जिंदगी में कभी-कभी ऐसा समय आ ही जाता है जिससे उभर पाना बेहद ही मुश्किल हो जाता है। हमारे जीवन में ऐसी कई सारी समस्याएं आ जाती है। जिनका सही होना तक नामुमकिन सा लगता है जैसे कि आज कल हर घर में घुटनों के दर्द की समस्या देखी जा रही है। इस समस्या में इंसान सही से चल नहीं पाता है यहां तक की सही से सीढ़िया तक नहीं चढ़ पाता है। उनके लिए अपने काम करना तक मुश्किल हो जाता है। कई बार घुटनों का दर्द चोट लगने या मांसपेशियों में होने वाले खिचांव की वजह से भी हो सकता है। ऐसे ही एक कहानी है दिल्ली की रहने वाली विमला जेम्स की। जिन्हें घुटनों के दर्द की परेशानी ने इस कदर घेर लिया था कि वह बिना सहारे टॉयलेट तक नहीं जा पाती थी, लेकिन इस समस्या से उनका लड़ना ज्यादा समय तक नहीं रहा और उन्होंने खुद को बेहतर बनाया साथ ही कई सारे प्रयासों के बाद अपनी परेशानी को कम किया तो, आइए जानते है विमला जेम्स की घुटने के दर्द की सच्ची कहानी और ये भी जानेंगे कि उन्हें हकीम जी की किस बूटी से दर्द में फायदा मिला?
कौन है विमला जी? जानें इनकी प्रेऱणादायक कहानी।
दिल्ली के कटवारिया सराय में जे.एन.यू के पास डी.डी.ए फ्लैट्स के सी-ब्लॉक में रहने वाली 70 साल की विमला जेम्स काफी शांत स्वभाव की महिला हैं। आपको बता दें उनका पैतृक घर पंजाब लुधियाना में है। विमला जी के तीन बच्चे हैं सभी बाहर विदेश में रहते है। वह कभी-कभी मोहल्ले में जो पैरेंट्स नौकरी करते है उनके बच्चों की देखभाल कर लिया करती थी। इससे उनका अच्छा समय बीत जाता था। खुशहाल जिंदगी गुजार रही विमला जी का जीवन आसान नहीं था दरअसल विमाला जी घुटनों के दर्द से बेहद परेशान चल रही थी। उनका दर्द इतना था कि वह बिना सहारे कहीं नहीं जाती थी। उनका सीढियों पर बैठ-बैठ कर चलना उन्हें लाचार बना रहा था। विमला जी बताती है कि अपनी पोती को अपने साथ रखा करती थी, लेकिन जब से उन्हें घुटनों के दर्द की दिक्कत रहने लगी तो उनकी बेटी उनका सहारा बनने के लिए उन्हीं के साथ रहने लगी। दरअसल एक तो बुढ़ापा औऱ ऊपर से बढ़ता हुआ दर्द उनके लिए परेशानी बन गया। उन्हें हमेशा स्वस्थ होने की चिंता बनी रहती की क्या वो पहले कि तरह बेहतर हो पाएंगे।
घुटनों के दर्द के साथ इन्होंने कैसे गुज़ारा जीवन?
विमला जेम्स जी बताती है कि उन्हें जब से घुटने के दर्द की परेशानी बननी शरू हुई है तब से वह सीढ़िया चढ़ने वह उतरने में बहुत घबराती थी। उनको ट़ॉयलेट भी उनकी बेटी हाथ पकड़ कर ले जाया करती थी। उन्हें हर समय ये चिंता बनीं रहती थी कि ना जाने वह कब सही हो पाएंगी। उनको लगता था कि वह कहीं बच्चों पर बोझ ना बन जाएं। बता दें, कि विमला जी ने अपने घुटने की समस्या के लिए फिजियोथेरेपी भी ली, लेकिन उससे कुछ दिन के लिए आराम हो जाता फिर उन्हें घुटनों के दर्द की समस्या सताने लग जाती थी, लेकिन कहते है अगर आपका बुरा समय है तो, अच्छा समय भी ज़रूर आएगा। ऐसा ही विमला जी के साथ हुआ उनका अच्छा समय आ गया और उन्हें सही रास्ता मिल गया।
किन कठिनाईयों का करना पड़ा सामना?
- इन्हें सीढ़ियां चढ़ने उतने में करना पड़ता था दिक्कतों का सामना।
- विमला जी दीवार के सहारे चलने को हो गई थी काफी मजबूर
- डॉक्टर ने घुटनों के ऑपरेशन का सुझाव दिया था, जिससे उनकी चिंताएं और बढ़ गई थी।
हकीम सुलेमान खान साहब से कैसे हुआ जुड़ना?
एक दिन जब विमला जी रोज़ाना की तरह टी.वी देख रही थी कि तभी उनकी नज़र हकीम साहब के सबसे चर्चित शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। इस शो में उनकी मुलाकात मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब से हुई। जहां हकीम साहब लोगों की समस्याओं के लिए यूनानी बूटी के बारे में बता रहे थे। लोगों की सच्ची कहानियां सुनकर विमला जी को भी विश्वास जागा की वह हकीम साहब की बूटी से अपने घुटनों के दर्द को कम कर सकती है इसलिए विमला जी ने टी.वी पर दिखाए गए नंबर पर कॉल किया और अपनी परेशानी बताई। हकीम साहब की टीम ने विमला जी की समस्या को सही से सुना और समझा फिर विमला जी को गोंद सियाह खाने की सलाह दी। विमला जी ने देर ना लगाते हुए ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से इस यूनानी बूटी ऑर्डर किया। साथ ही इसका सेवन करने के कुछ समय बाद ही विमला जी को अपनी समस्या कम होते दिखाई देने लगी। अब विमला जी हकीम सुलेमान साहब की बूटी गोंद सियाह का सेवन करती है। ऐसा करने से उन्हें कुछ ही महीनों के बाद फायदा मिला। धीरे-धीरे उनके घुटनों का दर्द कम होने लगा और उनके जीवन में सुधार आने लगा। इस बूटी के सेवन से उन्होंने पहले से ज्यादा राहत महसूस की। घुटनों के दर्द में तो उन्हें आराम मिला ही पर अब उन्हें अगर कोई और तकलीफ होती है तो वह अब हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को भी अपनाती है।
विमला जी के जीवन में आए महत्वपूर्ण बदलाव-
- अब बिना दर्द के और बिना किसी सहारे के आसानी से घर के काम कर सकती हैं ।
- सीढ़ियाँ चढ़ने और सामान्य रूप से चलने में कोई समस्या नहीं होती है।
- पहले दीवार के सहारे चलती थी पर अब नहीं किसी सहारे की मोहताज।
जिस महिला ने घुटनों के दर्द से राहत पाने की उम्मीद छोड़ दी थी अब वो आसानी से अपने घर के बाहर 4-5 चलकर चक्कर लगा लेती है। यहां तक सीढ़िया भी आसानी से चढ़ लेती है और उतर भी जाती है। विमला जी का कहना है कि हकीम साहब आज के समय में जो काम कर रहे हैं उसके लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। हकीम साहब बिना किसी स्वार्थ के लोगों की मदद कर रहे हैं। उन्हें बड़ी से बड़ी समस्याओं से बचा रहे हैं। हकीम साहब के लिए विमली जी यही दुआ करते हैं कि वह ऐसे ही स्वस्थ रहें और इसी प्रकार से लोगों की मदद करते रहे। आज विमली जी हकीम जी की यूनानी बूटी को अपनाकर बेहद खुशी के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। साथ ही, वे हकीम जी की बूटी को अपनाने की सलाह अपने दोस्तों को भी देती है। आज विमली जी अपनी सभी परेशानियों के कम होने का सारा श्रेय यूनानी की मशहूर हकीम साहब को देती है। साथ ही उनका तेह दिल से शुक्रिया करती हैं।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



