अक्सर हमने जरूर ये सुना है कि जब खुद पर बीतती है तभी दूसरे की समस्या समझ में आती हैं। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं। ये कहानी है पटना की सुधा जी की। जिनके लिए जोड़ों का दर्द मानों मुसीबत ही बन गया हो। ऐसे में उनके घुटनों ने बिल्कुल जवाब ही दे दिया था। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की जिंदगी में आगे क्या होगा। उनकी समस्या इतनी बढ़ गई थी की उनका उठना-बैठना भी कष्टदायी हो गया था। घर के सारे काम उनके पति और बेटे को करने पड़ रहे थे, कई डॉक्टरों को दिखाने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिल पा रही थी। इसके साथ ही उनकी सासो माँ को भी बुढ़ापे की वजह से जोड़ों की परेशानी थी। जब इतनी परेशानियों से उनका परिवार घिर गया तो फिर एक दिन हकीम सुलेमान खान साहब उनकी जिंदगी में एक फरिश्ता बनाकर आए। उनकी बताई हुई यूनानी बूटी का सेवन करने से सास-बहु दोनों को दर्द में काफी फायदा मिल गया। जिससे अब उनकी जिंदगी बहुत ही आसान और सुखमय हो गई है। चलिए आपको बताते हैं उनकी पूरी कहानी के बारे में।
आखिर कौन है सुधा पाठक? जानें दर्दभरी कहानी
सुधा जी एक बहुत ही मिलनसार, पारिवारिक और सरल स्वभाव की महिला है। पटना शहर से कुछ दूरी पर स्थित एक गाँव राम कृष्ण नगर में रहने वाली सुधा जी अपने परिवार की सुख-सुविधाओं का हमेशा से ख्याल रखती आई हैं। वह एक घरेलू महिला हैं लेकिन परिवार के लोगों का ख्याल रखने के साथ वह अपना ख्याल नहीं रख पाईं और घुटनों के दर्द से परेशान हो गईं। वो कहते हैं न जीवन में सुख और दुख बने ही रहते हैं शायद उनके जीवन में भी दुखों का दौर चल रहा था जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ने लगी थी।
दरअसल एक दिन अचानक सुधा जी के दायें पैर के घुटने में दर्द होने लगा। लेकिन ये वो समय था जब उनकी माँ और सासो माँ दोनों की तबीयत खराब थी, जिस वजह से वह अपने दर्द को इग्नोर करके काम करती रही। उनकी इसी लापरवाही की वजह से दर्द बढ़ता चला गया, एक डेढ़ महीने में ही दर्द इतना बढ़ गया कि उनका उठना-बैठना, सीढ़ियाँ चढ़ना, यहां तक कि घर के छोटे-छोटे काम जैसे झाड़ू-पोंछा करना, कपड़े धोना, और सब्जी काटना भी उनके लिए कठिन हो गया था। इस हालत की वजह से घर के सारे काम उनके बेटे और पति को करने पड़ रहे थे। बेटे और पति को काम करते हुए देखकर सुधा जी का मन बहुत उदास रहता था। कभी-कभी वह पेन किलर खाकर खुद काम करने लगती थीं। सुधा जी पेन किलर खाती रहीं, और काम करती रहीं लेकिन पेन किलर से उतने ही समय के लिए राहत मिलती थी जब तक दवाई का असर रहता था। थोड़े समय के लिए सब सही था पर फिर से उनकी हालत पहले जैसी हो जाती थी। आपको बता दें सुधा जी के जीवन में एक ऐसा समय आया था जब उनके 3 से 4 महीने ऐसे गुजरे की उनके पति और बेटे को ही घर के सारे काम करने पड़े। उनके परिवार की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गई थी क्योंकि एक तरफ तो उनकी सासो माँ बीमार थी और बुढ़ापे की वजह से जोड़ों के दर्द से जूझ रही थी वहीं दूसरी तरफ सुधा जी के घुटने का दर्द भी बढ़ता ही जा रहा था।
हकीम सुलेमान खान साहब से कैसे जुड़ी सुधा जी?
सुधा जी डॉक्टर के पास जाने से बचती थीं क्योंकि उन्हें अंग्रेजी दवाइयों पर कोई विश्वास नहीं था। एक दिन उनके पति यूट्यूब पर ही दर्द को कम करने के तरीके ढूँढ रहे थे तो इन्हें फिर अचनाक से हकीम साहब के बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी में हकीम सुलेमान खान साहब की एक वीडियो मिली जिसमें वह जोड़ों के दर्द के लिए घरेलू नुस्खों और जोड़ों के दर्द में सबसे कारगर बूटी गोंद सियाह के बारे में बता रहे थे। हकीम साहब की वीडियो देखकर उनके मन में उम्मीद की एक किरण जागी। उन्होंने दिए गए नंबर पर कॉल करके मौजूद हकीम साहब के काबिल डॉक्टरों से बात की और समस्या के बार में बताया। जिसके बाद उनकी समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद गोंद सियाह खाने की सलाह दी। फिर क्या था बिना किसी देरी के उन्होंने हकीम साहब की ऑफिसियल वेबसाइट ATIYA HERBS से गोंद सियाह मंगाया और अपनी माता जी और पत्नी को भी सेवन करने के लिए दिया। इससे उन्हें कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगा।
सुधा जी की कहानी से जुड़ी खास परेशानियाँ:
- सुधा जी के घुटनों में दर्द इतना बढ़ गया कि उठना-बैठना और छोटे-छोटे काम करना भी मुश्किल हो गया।
- सासू माँ जोड़ों के दर्द की वजह से बुढ़ापे में बिस्तर पर लेटी रहती थीं।
- परिवार के सभी काम पति और बेटे को संभालने पड़ते थे।
इस बूटी से पहले की तरह हुई जिंदगी
सुधा जी को पहले कोई खास असर नहीं हुआ, तो इन्होंने सोचा की इससे भी कुछ नहीं होने वाला। लेकिन उनकी सासू माँ भी गोंद सियाह का सेवन कर रही थीं उन्हें पता था कि इस गोंद का असर होने में कम से कम 15 से 20 दिनों का समय लगता हैं। सासू माँ ने सुधा जी को समझाया की जब मंगा लिया है तो कुछ दिन और खाकर देख लो। सुधा जी ने खाना जारी रखा और फिर 15 दिनों के बाद उन्हें फर्क दिखाना शुरू हो गया। उन्हें दर्द में राहत मिलने लगी, 3 महीने तक लगातार सुबह शाम एक एक चुटकी गोंद सियाह के सेवन से उन्हें इतना फायदा मिल गया कि अब उनके पति घर के सारे काम इन पर छोड़ देते हैं, क्योंकि अब वह आसानी से घर के सारे काम करने लगी हैं और सीढ़ियाँ चढ़कर छत पर भी आसानी से चली जाती हैं।
हकीम साहब के नुस्खे अपनाने के बाद आए ये बदलाव :
- सुधा जी और उनकी सासू माँ को दर्द में फायदा मिला, जिससे वे फिर से सक्रिय हो गईं।
- सुधा जी घर के सभी काम सहजता से करने लगीं, जिससे परिवार का बोझ कम हुआ।
- दोनों को दर्द में फायदा मिलने से परिवार में खुशहाली लौट आई है।
सास बहू दोनों को मिला फायदा…अब देते हैं दूसरों को सलाह
जोड़ों की दिक्कत बढ़ने से पहले जहां घर में तकलीफों का पहाड़ टूट पड़ा था पर अब ऐसा नहीं है। सास-बहू दोनों को ही हकीम जी की बूटी से काफी फायदा मिला। आज जो वह स्वस्थ और सेहतमंद जिंदगी गुजार रही हैं उसका सारा श्रेय वह यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब को ही देती है। सुधा जी की जिंदगी पहले से अब काफी बेहतर हो चुकी है। अब सुधा जी और लोगों को भी हकीम जी के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देती है। ताकि जिस तरह से उन्हें आराम मिल पाया है उसी तरह और लोगों को भी आराम मिल सकें। सुधा जी हकीम जी की लंबी उम्र की कामना करती हैं और यहीं चाहती हैं कि वह इसी तरह लोगों की मदद करते रहें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



