पैरों में दर्द होना एक आम समस्या है और उम्र के साथ यह बढ़ता ही जाता है। जरूरी नहीं है कि दोनों ही पैरों में दर्द हो। ऐसा भी हो सकता है कि एक ही पैर में या फिर पैर के किसी एक हिस्से में दर्द हो जाये। कई बार तो पैरों का दर्द बर्दाश्त हो जाता है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि यह इतना तेज होता है कि बर्दाश्त करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कोई भी काम करना चुनौती बन जाता है। इसके अलावा कई बार पैरों में कमजोरी हो जाती है और कई बार ये सुन्न पड़ जाते हैं। पैरों की समस्या के कई कारण हो सकते हैं। कई बार ऐंठन के चलते, मांसपेशियों में अकड़न के कारण, मांसपेशियों के एक के ऊपर एक चढ़ जाने के कारण, पोषण की कमी के कारण, शरीर में पानी की कमी के चलते या लंबे वक्त तक एक ही मुद्रा में रहने की वजह से भी पैरों में दर्द हो जाता है। ऐसे ही एक शख्स है शिवचरण लाल वर्मा जी, जिन्हें कई समय से पैरों में दर्द की समस्या बनीं हुई थी। लेकिन उनकी यह समस्या ज्यादा दिन तक नहीं रही तो आइए जानते है कि शिवचरण जी ने कैसे खुद को स्वस्थ किया और बेहतर जिंदगी गुजार रहे हैं?
किस समस्या ने बुढ़ापे में किया शिवचरण जी को लाचार?
87 साल के शिवचरण वर्मा जी लखनऊ के रहने वाले है। वह एक बहुत ही सरल और दयालु स्वभाव के व्यक्ति हैं। इस उम्र में हर किसी को किसी न किसी सहारे की ज़रूरत पड़ती है क्योंकि ये उम्र ही ऐसी होती है कि इसमें कोई न कोई तकलीफ आपके शरीर में हो ही जाती है ऐसा ही हुआ शिवचरण जी के साथ उन्हें पैरों की समस्या ने घेर लिया। वे बताते हैं कि उनके जीवन में दुख और सुखों का आना जाना तो लगा रहा है। और कहते हैं कि जब तक व्यक्ति के जीवन में दुख ना आयें तब तक वो सुख का आनंद ले ही नहीं सकता। उसी तरह शिवचरण जी ने भी अपने जीवन में काफी दुखों को झेला है। लेकिन जो दुख इस बुढ़ापे में मिला शायद वो बहुत ही मुश्किलों से भरा था। इस समस्या की वजह से उनके पैरों में दर्द और सूजन बनी रहती थी। उनके पैर सीधे नहीं हो पाते थे। उनके लिए चलना भी मुश्किल हो गया था। वह हर तरह से लाचार हो गए थे। उनके लिए जीवन जीना मुश्किल हो रहा था। उन्हें जीने की कोई आस नज़र नहीं आ रही थी।
इन्हें मुश्किल समय में किन परेशानियों को झेलना पड़ा? जानिए?
शिवचरण जी के लिए पैरों का दर्द एक बड़ी समस्या बन गई थी। उनके लिए दर्द में पूरा दिन काटना मुश्किल हो जाता था, वह कहीं आते-जाते भी नहीं थे, उन्हें इस समस्या से बचने का कोई रास्ता नहीं नजर आ रहा था। आखिर वो भी क्या ही कर सकते थे। उनके परिवार के लोग भी जिससे जो बन रहा था वही कर रहे थे। उनका पूरा दिन इसी चिंता में गुजरता था कि वह किस तरह सही हो पाएंगे लेकिन वो कहते हैं ना वक्त सबका बदलता है आज बुरा है तो कल अच्छा ज़रूर आता है ऐसा ही शिवचरण जी के साथ हुआ उन्हें हकीम साहब का साथ मिला और उनका जीवन ही बदल गया। उन्हें लगने लगा कि अब वह पहले से बेहतर हो रहे है लेकिन कैसे उन्हें इस बारे में कैसे पता चला आइए जानते है?
बुढ़ापे में कैसे मिली पैरों के असहनीय दर्द से राहत?
शिवचरण जी बताते है कि उनका बेटा मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब का टी.वी पर चर्चित प्रोग्राम सेहत और जिंदगी देखा करता था। जिसमें वह देखते थे कि हकीम साहब लोगों को उनकी समस्याओं के लिए कामयाब बूटी के बारे में बता रहे हैं। उसी से प्रभावित होकर उनके बेटे ने अपने पिता शिवचरण जी को पैरों की तकलीफ के लिए हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को अपनाने की सलाह दी। यहां तक की उन्होंने प्रोग्राम से प्रेरित होकर अपने पिता शिवचऱण के लिए ATIYA HERBS से हकीम साहब की बूटी भी ऑर्डर की। जिसके इस्तेमाल से शिवचऱण जी को धीरे-धीरे कहीं न कहीं अपनी परेशानी कम होती दिखाई देने लगी। शिवचरण जी बताते है कि उन्होंने हकीम साहब के निर्देश अनुसार उस बूटी को सुबह-शाम लिया। जिससे उन्हें फायदा मिला। अब उन्हें चलने के लिए भी दूसरों का सहारा लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती है। अब वह हकीम साहब के शो को देखा करते है और उनकी बातों को अपने जीवन में उतारते है, शिवचरण जी कहते है कि वह हकीम साहब जी का साथ जिंदगीभर नहीं छोड़ेंगे। उनका नियम से सेवन करेंगे ताकि उनके अंदर फुर्ती और तंदुरुस्ती हमेशा के लिए बनी रहे।
शिवचरण जी की कहानी से जुड़े कुछ खास बिंदू:-
- पैरों के दर्द की वजह से उनका चलना-फिरना और उठना-बैठना मुश्किल हो गया था।
- सफर करने या एक जगह बैठे रहने से उनके पैरों में सूजन आ जाती थी।
- बुढ़ापे में दर्द की वजह से दूसरों का सहारा लेने को थे मोहताज़
अब पहले से बेहतर हो गई है इनकी जिंदगी
शिवचरण जी अब काफी स्वस्थ और सेहतमंद हो गये हैं और आज अपनी स्वस्थ और सेहतमंद जिंदगी का सारा श्रेय वे हकीम सुलेमान खान साहब को देते है और हकीम साहब के लिए कहते है कि वह जो काम कर रहे है उसके लिए बड़ा दिल चाहिए। जैसे उन्होंने मेरी मदद की वैसे ही सभी की मदद करें और स्वस्थ रहें। हकीम साहब का आज वे तहे दिल से शुक्रिया करते है और उनकी लंबी उम्र की दुआ करते है। आपको बता दें अब उन्हें उठने-बैठने चलने-फिरने में किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं होती है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
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