जीवन भी अजीब हैं न… बचपन, जवानी और फिर बुढ़ापा महज चार साल की उम्र से बच्चों को किताबें पकड़ा दी जाती हैं जिसके बाद नौकरी लगने तक उसका जीवन किताबों में ही बीतता है। नौकरी करते-करते और बच्चों को पालते-पोसते कब जवानी निकल जाती है, पता ही नहीं चलता और फिर शुरू होता है बुढ़ापे का सफर जो कभी-कभी दुख-दर्द और तकलीफ से भरा होता है। ये वो समय होता है जब बच्चे भी अपने-अपने काम धंधे में लग जाते हैं। जीवन में रह जाता है तो सिर्फ और सिर्फ अकेलापन। इतने पर भी अगर किसी तरह का कोई दर्द शरीर में आ जाए, तो फिर जीवन परेशानियों के सहारे निकलना शुरू हो जाता है। कई सालों तक डॉक्टरों के चक्कर लगाने के बाद भी जब दर्द में राहत नहीं मिलती तो जिंदगी आसान नहीं लगती है। कुछ ऐसी ही कहानी है
बिहार के पटना से लगभग 70 किलोमीटर दूर बाढ़ कस्बे के पंचशील नगर में रहने वाले 75 वर्षीय सच्चिदानंद जी की। चलिए आपको बताते हैं उनकी दर्द भरी कहानी के बारे में, पूरे 15 साल तक घुटनों के दर्द से जूझने के बाद उन्हें कैसे घुटने दर्द में राहत मिली?
जानिए कौन है सच्चिदानंद सिन्हा?
सच्चिदानंद सिन्हा शांत स्वभाव के सज्जन व्यक्ति हैं। उनकी उम्र 75 साल है। वह अपनी पत्नी के साथ बिहार के पटना से लगभग 70 किलोमीटर दूर बाढ़ कस्बे के पंचशील नगर में रहते हैं। उनके दो बेटे हैं जिनमें से बड़ा बेटा अमेरिका में रहता है जबकि दूसरा गुड़गाँव में। सच्चिदानंद जी बिहार सरकार में सरकारी नौकरी करते थे लेकिन नौकरी से रिटायर्ड होने के बाद साल 2007 में उन्हें बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा जिस वजह से उन्हें घुटनों के दर्द की समस्या रहने लगी। साल 2010 तक यह दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया और धीरे-धीरे कमर तक पहुँच गया। घुटने का दर्द इतना बढ़ गया कि दो कदम चलने पर भी उन्हें ऐसा लगता था जैसे पैर के घुटने टूटकर कभी भी अलग हो जाएंगे। इस दर्द की वजह से उनकी पूरी दिनचर्या ही बदल गई थी।
आखिर सच्चिदानंद जी को किन-किन परेशानियों का करना पड़ा सामना?
घुटनों के दर्द से परेशान सच्चिदानंद जी को सुबह उठकर बाथरूम तक जाने के लिए भी सहारे की जरूरत पड़ती थी। उन्हें सहारा देने वाला कोई नहीं था, वह जैसे-तैसे बेड का सहारा लेकर उठते थे और छड़ी के सहारे दीवार पर हाथ टिकाकर बाथरूम तक जाते थे। छत पर जाना तो उनके लिए लगभग असंभव हो गया था। अगर कभी किसी जरूरी काम से जाना पड़ता था तो रेलिंग को पकड़-पकड़कर लँगड़ाते हुए जाते थे। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए और क्या नहीं?
सच्चिदानंद जी ने पटना के कई डॉक्टरों को दिखाया। डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से उन्हें ये दर्द हो रहा है। जब डॉक्टर ने दवा खाने के लिए बताई तो इससे कुछ दिनों के लिए उनका दर्द कम हो जाता लेकिन थोड़े समय बाद उनका दर्द पहले की तरह हो जाता था। किसी भी तरह से उनके दर्द में कोई फर्क नहीं आ रहा था। उनकी स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि लगातार कुछ समय तक बैठे रहने पर, बस या फिर ट्रेन में सफर करने पर पैरों में बहुत ज्यादा सूजन आ जाती थी। उन्हें उठने-बैठने और चलने-फिरने में अत्यधिक कठिनाई और दर्द का सामना करना पढ़ रहा था। घुटने के दर्द ने उनकी जिंदगी को बहुत ही मुश्किल बना दिया था। उनके जानने वाले जब उनसे मिलने आते थे तो वह उन्हें यही सलाह देते थे कि घुटनों का ऑपरेशन करा लो, लेकिन वह ऑपरेशन कराना नहीं चाहते थे।
सच्चिदानंद जी की कहानी से जुड़े कुछ खास बिंदू:
- घुटनों के दर्द की वजह से उनका चलना-फिरना और उठना-बैठना मुश्किल हो गया था।
- लगातार बैठने या सफर करने पर उनके पैरों में सूजन आ जाती थी।
- 15 साल से सच्चिदानंद जी घुटनों का दर्द झेल रहे थे
हकीम साहब लेकर आए सच्चिदानंद जी के जीवन में उम्मीद की नई किरण
घुटनों के दर्द से परेशान सच्चिदानंद जी को इस परेशानी को झेलते हुए लगभग 15 साल हो गए थे। कई जगह दिखाने के बाद भी उन्हें किसी तरह का कोई फायदा नहीं हुआ। वह इसी दर्द के साथ अपनी जिंदगी बिताने के लिए मजबूर हो गए थे, पर उनके हौसले नहीं टूटे क्योंकि वो कहते हैं न समय हर किसी का एक जैसा नहीं रहता अगर आज परेशानी है तो कल खुशी भी आएगी, शायद उनके जीवन में भी यही बदलाव आने वाला था, सच्चिदानंद जी को उम्मीद की किरण उस समय दिखाई दी जब एक दिन टीवी का चैनल बदलते समय उन्होंने हकीम सुलेमान खान साहब का चर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा और मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब की सबसे कारगर बूटी के बारे में सुना, जिसके बाद अब वह रोजाना ये प्रोग्राम देखने लगे। कुछ दिनों तक लगातार इस प्रोग्राम को देखने के बाद उन्हें पता चला की हकीम जी की बूटी के सेवन से कई लोगों को फायदा भी मिला है। बिना किसी देरी के उन्होंने टीवी से नंबर लेकर कॉल किया और अपनी घुटनों की तकलीफ का जिक्र किया। हकीम जी ने सच्चिदानंद जी की समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद घुटनों के दर्द के लिए गोंद सियाह के सेवन करने की सलाह दी। जिसके बाद सच्चिदानंद जी ने ATIYA HERBS की वेबसाइट से इस बूटी को मंगाया और सेवन करना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, सच्चिदानंद जी ने हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को भी अपनाया। रोजाना नियमित रूप से सुबह और शाम यूनानी बूटी के सेवन से कुछ ही महीने में ही उन्हें दर्द में फर्क लगने लगा। जिसके बाद उन्हें दर्द में पहले से काफी आराम मिला है।
सच्चिदानंद जी के जीवन में आया नया मोड़
सच्चिदानंद जी के जीवन में घुटनों के दर्द से मिली राहत के बाद एक नया मोड़ आ गया पहले जहां वो छड़ी और दीवार के सहारे बाथरूम तक जा नहीं पाते थे पर अब आसानी से बिना किसी सहारे के चल लेते हैं, उठ-बैठ सकते हैं, और सीढ़ियाँ भी आसानी से चढ़ जाते हैं। कितने भी देर तक बैठे रहने पर या फिर सफर करने पर अब उनके पैरों में सूजन नहीं होती। अब वह कहते हैं की उन्हें लगभग 80% से ज्यादा फायदा मिल गया है। आज जो वह स्वस्थ और बेहतर जिंदगी गुजार रहे हैं उसका सारा श्रेय वह यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब को देते हैं।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5545
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



