बढ़ती उम्र के साथ घुटनों का दर्द होना आज एक आम बात बन चुकी है। लेकिन कई बार यह परेशानी इस कदर बढ़ जाती है कि इंसान का रोज का चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसी ही एक दर्दभरी कहानी है गुजरात के सूरत मे रहने वाली रीता देवी की। वो अपने घुटनों के दर्द से इतनी परेशान थी की उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर उन्हें क्या करना चाहिए, लेकिन कहते है न जिसका कोई नहीं होता उसका स्वयं भगवान होता है ऐसा ही रीता जी के साथ था वो काफी दर्द में थी लेकिन फिर उन्हें हकीम जी की यूनानी बूटी के बारे मे पता चला और फिर उन्हें वो आराम मिल जिसकी तलाश उन्हें काफी समय से थी पर उन्हें ये समस्या कब और कैसे हुई और उन्हें इस बूटी से आराम कैसे मिला ?
आखिर क्या है रीता जी की सच्ची कहानी? जानिए यहाँ!
यह कहानी है गुजरात के सूरत में महादेव नगर 5, नवागाम डिंडोली की रहने वाली 60 वर्षीय रीता देवी जी की। रीता जी पिछले 6-7 साल से घुटनों के दर्द से परेशान थीं। शुरुआत में जब वह सुबह की सैर पर जाती थीं, तभी से उन्हें घुटनों में तकलीफ महसूस होने लगी थी। लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया और इसे एक आम समस्या समझ के नजरंदाज कर दिया लेकिन बढ़ते दिनों के साथ धीरे-धीरे यह दर्द इतना बढ़ गया कि उनके घुटनों की हड्डियों से कट-कट की आवाजें आने लगीं। दर्द की वजह से उनके पैरों में सूजन आ गई थी, जिसके कारण उनका उठना-बैठना पूरी तरह बंद हो गया। हालत यह हो गई थी कि वह नीचे बैठ भी नहीं पाती थीं इतना ही नहीं घर में पूजा करने के लिए भी उन्हें मजबूरी में कुर्सी का सहारा लेना पड़ता था।
इतना ही नहीं रीता जी को पैरों में दर्द तो तब बढ़ा जब वो गिर गई थी और गिरने की वजह से उनके घुटने खिसक गए थे और वहीं से उन्हें और असहनीय दर्द शुरू हो गया जिस कारण उनका उठना बैठना तक मुश्किल हो गया था!
रीता जी के परिवार ने उनके इस दर्द को कम करने के लिए कई जगहों पर डॉक्टरों को दिखाया। लेकिन कहीं कोई असर नहीं हुआ, डॉक्टरों ने बताया कि उनकी घुटने की हड्डी खिसक गई है और वहाँ की ग्रीस कम हो गई है। डॉक्टरों का कहना था कि बिना ऑपरेशन के इस दर्द मे आराम मिल पान मुश्किल है। ऑपरेशन की बात सुनकर रीता जी और उनका पूरा परिवार बेहद घबरा गया और रीता जी ने ऑपरेशन कराने से मना कर दिया। दर्द इतना ज़्यादा था कि वह पूरी-पूरी रात सो नहीं पाती थीं और रोते हुए रातें कटती थीं। उन्हें ऐसा लगने लगा था कि अब उनकी पूरी जिंदगी इसी तकलीफ और बिस्तर पर ही बीत जाएगी, लेकिन इस दर्द मे उन्हें शायद ही कभी आराम मिलेगा, लेकिन कहते है न की डूबते हुए को बस तिनके का ही सहारा काफी होता है ऐसा ही उनके साथ भी उन्हे उम्मीद तब जागी जब उन्होंने यूनानी का साथ मिला लेकिन वो यूनानी बूटी तक पहुंची कैसे जानने से पहले हम ये जानेंगे की आखिर उन्हें और किन किन समस्या का सामना करना पड़ा?
घुटनों के दर्द के कारण किन तकलीफों को झेलना पड़ा रीता जी को?
- हड्डियों में खिंचाव और सूजन के कारण चलना फिरना बंद हो गया।
- रीता जी के लिए नीचे बैठना तो दूर वो पूजा तक नहीं कर पाती थी।
- घुटनों के तेज दर्द की वजह से वह रात भर सो नहीं पाती थीं वे बिल्कुल हार मान चुकी थी।
जब निराशा के बीच मिली उम्मीद … यहीं से शुरू हुआ राहत का सफर।
जब हर तरफ से रास्ते बंद नजर आ रहे थे, तब एक दिन रीता जी के किसी जानकार ने उन्हें हकीम सुलेमान खान साहब के बारे मे बताया जिसके बाद रीता जी ने टीवी पर हकीम जी का बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा जहां पर कई लोग अपनी समस्या से राहत पाते नजर आ रहे थे उन्हें देख रीता जी के मन मे ये सवाल और भरोसा आया की जब इतने लोगों को उनकी परेशानी से आराम मिल रहा है तो उन्हें क्यों नहीं इसलिए उन्होंने बिना कुछ सोचे समझे हकीम जी की यूनानी बूटी मँगवाने का फैसला किया जिसके बाद उन्होंने टीवी पर दिए गए नंबर पर कॉल किया और उन्होंने अपनी सारी परेशानी हकीम जी के टीम से शेयर किया, जिसके बाद हकीम जी की टीम ने उन्हे गोंद सियाह लेने को कहा उनकी यह बातें सुनने के बाद रीता जी ने बिना किसी देरी के ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से गोंद सियाह मँगवाया और नियम के साथ समय पर उसका इस्तेमाल शुरू किया। कुछ समय बाद यूनानी बूटी अपनाने के कुछ ही महीने के अंदर ही उन्हें खुद मे काफी बदलाव दिखा जो पहले घुटनों के दर्द की वजह से उठ नहीं पाती थी झुक नहीं पाती आज वो आसानी से सभी काम कर लेती है, चलिए जानते हैं कि राहत मिलने के बाद उनकी जिंदगी में कितना बदलाव आया है।
गोंद सियाह से राहत के बाद जिंदगी में आए ये बड़े बदलाव!
- पहले की तरह उन्हें उठने-बैठने और चलने में तकलीफ नहीं होती।
- दर्द के कारण नीचे बैठकर पूजा नहीं कर पाती थी पर अब कर लेती हैं।
- आज वह बिना थके अपने घर के सारे कामकाज खुद आसानी से कर लेती हैं।
रीता जी की जिंदगी में दोबारा लौटी खुशियाँ
आज रीता जी की लाइफ में दोबारा से वही पुरानी खुशियां और रौनक लौट आई हैं। जो रीता जी कभी दर्द के कारण चलने-फिरने में भी परेशानी महसूस करती थीं, आज वह बिना किसी सहारे के आराम से अपने सभी काम आसानी से संभाल लेती हैं। उनके चेहरे पर एक अलग ही खुशी और नया आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। वह अपने जीवन में आए इस बदलाव के लिए हकीम सुलेमान खान साहब का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हैं, जिन्होंने उनके अनुभव को इतना बेहतर बनाने में मदद की।
रीता जी दुनिया के तमाम लोगों को अपनी इस कहानी के जरिए यही प्यारा मैसेज देना चाहती हैं कि लाइफ में चाहे कितना भी कठिन समय क्यों न आ जाए, इंसान को कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। मुश्किल दिनों में हमेशा थोड़ा सा संयम रखें, हौसला बनाए रखें और भरोसा रखें, क्योंकि सही कोशिश से जिंदगी में दोबारा बदलाव आ सकता है। आज वो खुद तो स्वस्थ हुई पर अपने रिश्तेदारों को हकीम जी के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देती हैं ताकि जैसे उन्हें राहत मिल पाई वैसे ही और लोगों को भी मिल सकें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5


