हर व्यक्ति अपनी स्किल और ज्ञान के अनुसार काम करता है। कुछ लोग दिमाग से काम करते हैं वहीं कुछ लोग शारीरिक श्रम करते हैं। शारीरिक श्रम करते समय कभी-कभी छोटी सी गलती भी बहुत भारी पड़ जाती है। जिस वजह से हमारी ज़िन्दगी उस मोड़ पर आकर खड़ी हो जाती है, जहां हमें महसूस होता है कि आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है। शरीर के दर्द और असहनीय तकलीफों के बीच, जीवन की उम्मीद भी धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। आज हम आपको ऐसी ही एक सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं। ये कहानी है महाराष्ट्र के पुणे में रिवर रोड के पास पिंपरी, चिंचवड के रहने वाले 54 साल के राजू कन्हैया लाल जी की, जो पेशे से एक अनुभवी वीडियोग्राफर हैं। वीडियोग्राफी के इस काम में उन्हें घंटों तक कंधों के सहारे एक हाथ पर कैमरा पकड़कर रखना पड़ता था। सालों तक लगातार ऐसा करने की वजह से उनकी जिंदगी सर्वाइकल और कंधे के असहनीय दर्द में सिमट कर रह गई थी। उनके एक हाथ में हमेशा झुनझुनी रहती थी। उन्हें डर लगने लगा था कहीं उनका दर्द बढ़ न जाए। ऐसे में जब वह डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने एक्सरे करके बताया कि सर्वाइकल के दर्द की दिक्कत है। वह लंबे समय तक दवाइयाँ खाते रहे लेकिन उनका दर्द वैसा ही बना हुआ था, जब उन्हें कोई जरूरी काम आ जाता तो वह दर्द की दवा खाकर काम करते थे।
राजू कन्हैया लाल जी की तकलीफ और संघर्षभरी कहानी
राजू कन्हैया लाल एक अनुभवी वीडियोग्राफर हैं। उनकी उम्र 54 साल है। उनके परिवार में उनकी माँ, बीवी और बच्चों के अलावा तीन भाई और उनके बीवी-बच्चें रहते हैं। राजू जी के जीवन में एक ऐसा कठिन समय आया जब सर्वाइकल के दर्द ने उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया था। न तो वह सही से सो पा रहे थे और न ही अपना काम कर पा रहे थे। दर्द की दवा खाने के बाद ही वह शूट के लिए जाते थे और दर्द को सहते हुए वीडियो शूट करते थे। यह दर्द न सिर्फ उनकी शारीरिक क्षमता पर असर डाल रहा था, बल्कि उन्हें बहुत कमजोर बना रहा था। उन्हें दिक्कत बढ़ने का डर बना रहता था। डॉक्टर की दी हुई दवाइयों से उतने ही समय के लिए राहत मिलती थी जब तक असर रहता था। असर जाते ही दर्द फिर से शुरू हो जाता था। उन्होंने कई तरह के रास्ते अपनाएं जैसे – तकिया लगाना बंद कर दिया, तरह-तरह के तेलों से मालिश की, इन सब के बाद भी जब कोई फायदा मिलता दिखाई नहीं दिया तो उन्हें अपना जीवन अंधकार में दिखने लगा था।
कहानी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदू-
- सर्वाइकल का दर्द इतना बढ़ गया कि वीडियोग्राफी का काम करने में भी तकलीफ होती थी।
- दर्द की वजह से सो भी नहीं पा रहे थे राजू कन्हैया लाल जी।
- उन्हें दिक्कत बढ़ने का डर बना रहता था।
हकीम साहब से जुड़कर मिली बेहतर होने की उम्मीद
राजू कन्हैया लाल जी की ज़िंदगी में सकारात्मक मोड़ तब आया जब उन्होंने टीवी पर हकीम सुलेमान खान साहब का प्रोग्राम सेहत और जिंदगी देखा। जिसमें हकीम जी अनेक समस्याओं के लिए यूनानी बूटी को आजमाने की बात कर रहे थे। इस प्रोग्राम को देखकर राजू कन्हैया लाल जी को पता चला कि हकीम साहब कई सालों से लोगों को बूटी के बारे में बताते आ रहे हैं। उनकी बताई हुई बूटी आजमाकर कई लोग तरह-तरह की शारीरिक समस्याओं से राहत पा चुके हैं। इस प्रोग्राम के जरिए कई लोगों को सुनने के बाद राजू जी ने हकीम साहब से जुड़कर उनके यूनानी बूटी आजमाने का विचार किया और दिए गए नंबर पर कॉल करके कंधे और सर्वाइकल के दर्द की समस्या के बारे में बताया। उनकी समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद उन्हें दर्द में कारगर मानी जाने वाली बूटी गोंद सियाह के सेवन की सलाह दी गई। राजू जी ने हकीम साहब की ऑफिशियल वेबसाइट ATIYA HERBS से गोंद सियाह मँगवा ली और सेवन शुरू कर दिया।
यूनानी बूटी का सेवन करने के बाद, राजू जी ने महसूस किया कि उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। पहले हफ्ते ही उन्होंने दर्द में बहुत बड़ा बदलाव देखा। जिसके बाद ही उन्होंने काम पर जाना शुरू कर दिया। अब आलम यह है कि वह फिर से पहले की तरह स्वस्थ हो गए हैं और वह अपने सभी काम बिना किसी दर्द के आसानी से कर पा रहे हैं। उनका जीवन फिर से पहले की तरह हो गया है और उनके मन से जो परेशानी को लेकर डर था वो भी निकल गया है।
अब दूसरों को देते हैं यूनानी बूटी अपनाने की सलाह
जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आ जाएं हमें कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अगर भगवान एक रास्ता बंद करते हैं तो दूसरा रास्ता भी जरूर खोलते हैं। एक समय था जब राजू कन्हैया लाल जी अपने सर्वाइकल के दर्द की समस्या से के लिए लोगों से पूछते थे। अब दूसरे लोग आकर उनसे राहत का तरीका पूछते हैं कि किस तरह सर्वाइकल दर्द से राहत मिली। राजू जी हर व्यक्ति को हकीम सुलेमान खान साहब से जुड़कर उनकी बताई हुई यूनानी बूटी को आजमाने की सलाह देते हैं। वह यही चाहते हैं कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें। आज जो वो खुशहाल जीवन गुजार रहे हैं वो सिर्फ हकीम जी कि वजह से ही संभव हो पाया है।
गोंद सियाह क्या है?
यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



