उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के सलोनी गांव की रहने वाली प्रेमवती जी की उम्र ऐसी है जहाँ इंसान आराम से अपने घर और परिवार के साथ दिन बिताना चाहता है। लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा दौर आया जब शारीरिक तकलीफों और नसों के खिंचाव की वजह से उनके रोज़मर्रा के कामों पर काफी बुरा असर पड़ने लगा था। जो महिला कभी पूरे घर की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ खेतों के काम भी खुद किया करती थी, वह अचानक अपने ही घर में एक-एक कदम चलने के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर हो गई। प्रेमवती जी पिछले काफी समय से घुटनों की समस्या से परेशान थीं। यह दिक्कत उनके घुटनों से शुरू होकर नीचे पूरे पैरों तक फैल गई थी। सर्दियों के मौसम में अचानक उनकी पैरो में सूजन आनी शुरू हुई थी, जिसे उन्होंने शुरुआत में नॉर्मल समझा। लेकिन समय बीतने के साथ-साथ यह सूजन और खिंचाव इतना बढ़ गया कि उनके लिए घर के छोटे-मोटे काम करना तो दूर, बिना लाठी या बिना किसी के सहारे खड़ा होना भी बहुत मुश्किल काम बन चुका था।
तकलीफ की वजह से वह अपने घर में भी बिना डंडे के एक कदम आगे नहीं बढ़ा पाती थीं। जब भी वह उठने या थोड़ा चलने की कोशिश करती थीं, तो उनकी पैरो और नसों में काफी खिंचाव महसूस होता था। जिस कारण उनका घुटनों का दर्द और बढ़ जाता, इस खिंचाव और परेशानी के कारण उनका चलना-फिरना बिल्कुल बंद सा हो गया था। घर की सीढ़ियां चढ़ना हो, नहाने के लिए पानी की बाल्टी उठाना हो या अपने कपड़े धोना हो, हर छोटे-बड़े काम के लिए उन्हें अपने परिवार के लोगों पर निर्भर रहना पड़ता था। प्रेमवती जी को ऐसा लगता था जैसे उनकी पैरो की नसें पूरी तरह से जकड़ गई हैं और यह खिंचाव घुटनों से शुरू होकर पूरे पैरों में नीचे तक चला जाता है। इस लगातार बनी रहने वाली समस्या की वजह से उनकी पूरी दिनचर्या ठहर सी गई थी और उनका ज्यादातर समय एक ही जगह बैठे-बैठे बीतता था।
इस तकलीफ से राहत पाने के लिए शुरुआती दिनों में उनके परिवार ने कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने घर में सिकाई करी गर्म पट्टी बाँधी ताकि उन्हें दर्द में राहत मिल सके! लेकिन उन्हें कोई खास या टिकाऊ आराम नहीं मिल पा रहा था। काफी चीजें करने के बाद भी जब दर्द में आराम नहीं हुआ, तो वह मन ही मन काफी उदास रहने लगी थीं। वह अक्सर यही सोचती रहती थीं कि क्या वह कभी दोबारा पहले की तरह बिना किसी लाठी या बिना किसी के सहारे के अपने पैरों पर चल पाएंगी भी या नहीं। परिवार के लोग भी उनकी यह हालत देखकर काफी परेशान रहते थे और समझ नहीं पा रहे थे कि इस परेशानी से राहत पाने के लिए अब क्या किया जाए?
घुटनों की समस्या की वजह से बढ़ीं इनकी मुश्किलें!
- बिना लाठी या सहारे के घर के अंदर भी चलना-फिरना बहुत कठिन हो गया था।
- घुटनों से लेकर नीचे पैरों तक खिंचाव बना रहता था।
- घर की सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, कपड़े धोना और घरेलू काम करने में काफी दिक्कत आती थी।
एक फैसले ने बदल दी प्रेमवती जी की जिंदगी! जानें कैसे?
प्रेमवती जी अपनी इस समस्या से काफी परेशान रहने लगी थीं, लेकिन कहते हैं न कि अगर आप सही दिशा में कोशिश करते रहें तो कोई न कोई रास्ता ज़रूर मिल जाता है। ऐसे ही एक दिन उनके दामाद जी ने उन्हें और उनके परिवार को हकीम सुलेमान खान साहब के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि हकीम जी की यूनानी बूटी से दर्द में राहत मिल सकती है। इसलिए वो प्रेमवती जी के लिए यूनानी बूटी मंगा रहे है उनकी बात सुनकर अब प्रेमवती जी के साथ परिवार वालो ने टीवी पर हकीम साहब का बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा उसमे कई लोग अपने अनुभव के बारे में बता रहे थे की किस तरह से उन्हें उनके दर्द में राहत मिली है, जिसके बाद प्रेमवती जी ने अपने दामाद जी को ये यूनानी बूटी आर्डर करने को कहा, उनके दामाद जी ने तुरंत हकीम जी की टीम के पास कॉल किया और अपनी सास यानी प्रेमवती जी की परेशानी बताई, जिसके बाद टीम ने उन्हें गोंद सियाह लेने की सलाह दी, फिर क्या था प्रेमवती जी के दामाद जी ने तुरंत ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से गोंद सियाह आर्डर किया और जब वो घर आया तो प्रेमवती जी ने बताए गए नियम अनुसार बूटी का सेवन शुरू किया और साथ ही हकीम साहब के घरेलू नुस्खे भी अपनाए। कुछ समय तक नियमित और सही तरीके से इस्तेमाल करने के बाद प्रेमवती जी को अपने घुटनों में काफी हद तक आराम महसूस होने लगा।
राहत मिलने के बाद आए ये महत्वपूर्ण बदलाव
- अब प्रेमवती जी बिना किसी लाठी या डंडे के खुद अपने पैरों पर चलने-फिरने लगी हैं।
- पैरों की नसों का खिंचाव काफी कम हो गया है, जिससे अब उन्हें चलने में आराम है।
- घर की सीढ़ियां चढ़ना-उतरना, कपड़े धोना और बाल्टी उठाना जैसे काम अब वह आसानी से कर लेती हैं।
- अब वह बिना किसी दिक्कत के खेतों में जाकर भी अपने हल्के-फुल्के काम देख पा रही हैं।
आज प्रेमवती जी अपने रोज के काम बिना किसी की मदद के खुद कर रही हैं। अब वो लाठी का सहारा नहीं लेती है और अपने सभी काम बहुत आसानी से कर रही हैं। उनकी यह कहानी बताती है कि अगर सही समय पर सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो दैनिक जीवन की तकलीफों को काफी हद तक आसान बनाया जा सकता है। वह हकीम सुलेमान खान साहब का धन्यवाद करती हैं, जिनकी सही सलाह से उनकी जिंदगी में यह बेहतर बदलाव आ सका। वह यही चाहती हैं कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करें ताकि जैसे उन्हें आराम मिला वैसे ही और लोगों को मिल सकें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
