बुढ़ापे में घुटनों का दर्द शुरू होते ही रोज के छोटे-छोटे काम भी किसी बड़े पहाड़ जैसे लगने लगते हैं। सुबह बिस्तर से उठना, बाथरूम तक जाना या सोफे से खड़े होना भी एक बड़ा संघर्ष बन जाता है। हालत यह हो जाती है कि इंसान जमीन पर बैठना तो दूर, छड़ी या दीवार का सहारा लिए बिना दो कदम चल भी नहीं पाता। घर की सीढ़ियां जो कभी दो-दो करके चढ़ जाते थे, अब उन्हें देखकर ही दिल घबराने लगता है। ऐसी ही कहानी पंजाब के होशियारपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर, गढ़शंकर तहसील के पहाड़ी इलाके में बसे अचलपुर गाँव के रहने वाले 56 वर्षीय परमजीत सिंह जी की, उनका जीवन खेतों की हरियाली और कड़ी मेहनत के बीच बीतता है। परमजीत जी पेशे से एक किसान हैं। वह दिन भर खेतों में दौड़-भाग करने और फसलों की देखभाल करने में माहिर थे, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जीवन के इस पड़ाव पर उनके घुटनों का दर्द इस तरह बदलेगा कि उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
परमजीत जी के लिए यह समय खेतों में खुलकर काम करने और खुशियाँ बांटने का होना चाहिए था, लेकिन कुछ समय पहले शुरू हुए घुटनों के दर्द ने उनकी दुनिया ही बदल दी। हालत ऐसे हो गए थे कि डॉक्टरों ने साफ़ कह दिया था न चौकड़ी (पालथी) मारनी है, न पैरों के बल बैठना है। एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी पूरी जिंदगी एक्टिव रहा, वह अचानक चलने-फिरने के लिए दूसरों का मोहताज होने लगा। दर्द के कारण उनकी चीजे लगातार बिगड़ने लगी। घुटनों में होने वाले असहनीय तकलीफ ने उनके जीवन को मुश्किल बना दिया था। उन्हें उठने-बैठने के लिए भी सहारा लेना पड़ता था।
घुटनों के दर्द में रहे सहारे के मोहताज..आखिर क्यों?
आपको बता दें की परमजीत जी के लिए यह समय सिर्फ शरीर का दुःख ही नहीं, बल्कि दिमागी मजबूती की परीक्षा का भी था। हालत यह थी कि अगर वो बैठ गए तो खड़ा होना मुश्किल था। जमीन पर दोनों हाथ टिकाकर, शरीर को टेढ़ा करके किसी तरह सहारा लेकर खड़ा होना पड़ता था। रात में करवट लेते समय जब दोनों घुटने आपस में छूते थे, तो उनसे दर्द सहा नहीं जाता था। उन्होंने अपनी इस तकलीफ को कम करने के लिए कई जगह दिखाया बहुत हाथ-पैर मारे, लेकिन राहत जरा भी नहीं थी। वह अपने ही घर की सीढ़ियां चढ़ने के लिए रेलिंग का सहारा लेकर, उन्हें लगने लगा था कि अब घुटने बदलवाने ही पड़ेंगे।
कई सारी परेशानियों को झेलना बना तकलीफ का कारण:-
- वह बिना सहारे के न बैठ पाते थे और न खड़े हो पाते थे।
- चलने-फिरने के कामों के लिए भी दूसरों का सहारा लेना पड़ता था
- कई जगह दिखवाने के बाद भी नही मिली राहत!
हकीम जी की यूनानी बूटी से मिली उम्मीद की नयी राह
वो कहते हैं कि जब सब रास्ते बंद हो जाते हैं, तो ऊपर वाला एक नया रास्ता जरूर दिखाता है। 2 साल तक घुटनों के दर्द से परेशान हुए परमजीत जी ने जब टीवी पर हकीम सुलेमान खान साहब का मशहूर शो सेहत और जिंदगी देखा। तो उन्हें उनकी यूनानी बूटी पर भरोसा हुआ क्योंकि वहां कई लोग अपने अनुभवों को शेयर कर रहे थे, और उन्हें ही देख परमजीत जी को यह विश्वास हुआ कि जब इतने लोगों की समस्या में आराम मिल रहा है, तो उन्हें आराम क्यों नहीं मिलेगा?
इसलिए उन्होंने बिना किसी देरी के टीवी पर आ रहे नंबर पर कॉल किया और हकीम जी की टीम को अपनी सारी परेशानी बताई। उनकी समस्या सुनने के बाद हकीम जी की टीम ने उन्हें गोंद सियाह लेने की सलाह दी। जिसके बाद परमजीत जी ने ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से गोंद सियाह ऑर्डर किया और हकीम जी की टीम द्वारा बताए गए नियम और परहेज के अनुसार उसका सेवन करना शुरू किया। एक समझदार इंसान होने के नाते वह यह जानते थे कि अगर थोड़ा सब्र कर लिया जाए तो कभी न कभी राहत मिल ही जाएगी। और फिर सिर्फ कुछ महीनों के अंदर परमजीत जी को अपनी तकलीफ में बदलाव महसूस होने लगा जो वो पहले चाहते थे। उनके पैरों का दर्द और घुटनों की टीस धीरे-धीरे कम होने लगी और अब वह पहले की तरह आसानी से कोई भी काम कर लेते है।
परमजीत जी के जीवन में आए ये महत्वपूर्ण बदलाव:-
- घुटनों का पुराना दर्द, टीस और पैरों की दिक्कत धीरे-धीरे कम हो गई।
- अब उठने-बैठने के लिए जमीन पर हाथ टेकने की जरूरत नहीं पड़ती!
- बिना किसी सपोर्ट के दो-दो सीढ़ियां एक साथ आसानी से चढ़ जाते हैं।
फिर से लौट आया इनका पुराना आत्मविश्वास
परमजीत सिंह जी जो कल तक जमीन पर हाथ टेककर बड़ी मुश्किल से कदम बढ़ाते थे, आज वह बिना किसी सहारे के उठ जाते है दौड़ते-भागते हैं। उनके चेहरे पर अब मायूसी नहीं, बल्कि एक ख़ुशी है। अब वो बिना किसी सपोर्ट के दो-दो सीढ़ियां आसानी से चढ़ जाते हैं। खेतों का सारा काम वो खुद कर रहे हैं और 60 किलो की बोरी अकेले उठा लेते हैं। यहाँ तक कि वो 60 किलो के इंसान को भी आसानी से उठा लेते हैं। उनके अंदर वह पुराना आत्मविश्वास लौट आया है वह यही चाहते हैं कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें जैसे उन्हें आराम मिला है वैसे ही और लोगों को भी दर्द में राहत मिल सकें। इसके लिए वो और लोगों को भी जो कई समस्याओं से परेशान हैं उन्हें भी हकीम साहब के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देते हैं। आज जो वो खुशहाल और बेहतर जिंदगी जी रहे हैं ये सब कुछ हकीम जी की मदद से ही संभव हो पाया है।
गोंद सियाह क्या है?
यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5


