बढ़ती उम्र अपने साथ अनुभव तो लाती है, लेकिन कई बार शरीर की कमजोरियाँ भी धीरे-धीरे परेशानी की वजह बनने लगती हैं। आज के समय में बदलती जीवनशैली के कारण परेशानियां पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यही छोटी समस्याएँ आगे चलकर बड़ी दिक्कतों में बदल जाती हैं। घुटनों में खिंचाव और दर्द उम्र बढ़ने के साथ एक आम बात मानी जाती है, लेकिन जब यही तकलीफ बढ़ जाए, तो हर कदम एक चुनौती बन जाता है। चलना-फिरना, सीढ़ियाँ चढ़ना, यहाँ तक कि रोज के छोटे-छोटे काम भी बहुत मुश्किल लगते हैं। ऐसी ही एक कहानी है मनीष शर्मा जी की, जो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में स्थित लोनी के इंद्रापुरी, गली नंबर 2 में रहते हैं। एक समय था जब उनका जीवन काफी आसान था, लेकिन धीरे-धीरे घुटनों की तकलीफ उनकी जिंदगी की बड़ी परेशानी बनने लगी। शुरुआत में उन्होंने इसे मामूली समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन समय के साथ दिक्कत इतनी बढ़ गई कि उनका जमीन पर बैठना और सीढ़ियाँ चढ़ना भी बंद हो गया। राहत पाने के लिए मनीष जी काफी परेशान रहने लगे थे। हर दिन उनके लिए एक नई चुनौती लेकर आता था, और मन में निराशा घर करने लगी थी। आज मनीष शर्मा जी पहले से कहीं ज्यादा बेहतर महसूस करते हैं। उनकी कहानी यह बताती है कि सही समय पर सही रास्ता मिलने से उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। तो आइए जानते हैं कौन हैं मनीष शर्मा जी, कैसे उन्हें हकीम सुलेमान खान जी के बारे में जानकारी मिली, और किस तरह उन्होंने इस मुश्किल सफर से बाहर निकलकर एक नई शुरुआत की।
आख़िर कौन हैं मनीष शर्मा जी? चलिए जानते हैं?
मनीष शर्मा जी जो उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद के लोनी स्थित इंद्रापुरी, गली नंबर 2 में रहते हैं। पेशे से वो एक कारपेंटर हैं, वो स्वभाव से काफी नर्म और सीधे-सादे इंसान हैं, लेकिन कौन जानता था कि एक दिन उन्हें घुटनों की इतनी बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ेगा। उम्र बढ़ने के साथ उनके दोनों घुटनों के जोड़ों में लगातार खिंचाव और परेशानी रहने लगी। दरअसल, घुटनों के जोड़ों में खिंचाव के कारण उन्हें सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने में परेशानी होने लगी थी।
आपको बता दें कि मनीष जी को रोज के नॉर्मल काम निपटाने में भी बहुत तकलीफ होती थी। जब वह घर के टॉयलेट में बैठते थे, तो उन्हें दीवार का सहारा लेकर बहुत मुश्किल से बैठना पड़ता था। इसके अलावा, वह जब भी पूजा करने बैठते थे, तो अपने घुटनों को आसानी से मोड़ नहीं पाते थे और उठते-बैठते समय उनके घुटनों से खिंचाव महसूस होता था। सीढ़ियाँ चढ़ते समय दीवार पकड़नी पड़ती थी और कट-कट की हल्की आवाज भी आती थी। इन समस्याओं की वजह से उनका उठना-बैठना और रोजाना पूजा-पाठ करना भी मुश्किल हो गया था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि उनकी यह समस्या कैसे कम होगी। लेकिन कहते हैं न कि हर समस्या का कोई न कोई रास्ता जरुर होता है, ऐसा ही मनीष जी के साथ हुआ। बाद में उन्हें हकीम साहब के बारे में पता लगा और जब से जानकारी मिली, तब से उनकी जिंदगी बदल गई। पर उससे पहले उन्होंने काफी दिक्कतों का सामना किया, चलिए जानते हैं आख़िर उन्हें कौन सी परेशानी होती थी?
घुटनों की समस्या ने कैसे बढ़ाई इनकी परेशानी?
- दोनों घुटनों के जोड़ों में लगातार खिंचाव रहता था।
- इन्हें सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते समय दीवार का सहारा लेना पड़ता।
- जमीन पर या टॉयलेट में बैठते समय इन्हें भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता था।
मनीष शर्मा जी को कैसे मिली उम्मीद की नई किरण?
जब चारों तरफ निराशा फैल जाती है, तो एक नई किरण रास्ता दिखाती है। ऐसा ही कुछ मनीष जी के साथ हुआ। जब उन्हें घुटनों के खिंचाव में राहत नहीं मिल रही थी, तो वह काफी परेशान हो गए थे। फिर एक दिन उन्हें हकीम सुलेमान खान साहब का एक बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा उसमे लोग अपने अपने एक्सपीरियंस शेयर कर रहे थे उन्हें देख मनीष जी को भी लगा की क्यों न एक बार इसे भी ट्राय किया जाए इसलिए उन्होंने बिना देरी किये। टीवी पर दिखा रहे नंबर पर कॉल किया जिसके बाद उन्होंने हकीम जी की टीम से बात करके अपनी पूरी समस्या बताई, और टीम ने उन्हें गोंद सियाह का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई।
मनीष जी ने बिना देरी किए ATIYA HERBS से गोंद सियाह मंगवाया और बताए गए नियमों के अनुसार उसका नियमित सेवन शुरू किया। इसी के साथ उन्होंने हकीम साहब के घरेलू नुस्खे भी आजमाएं और नियमित इस्तेमाल से ही उन्हें अपने घुटनों में काफी आराम देखने को मिला। जो समस्याएं मनीष जी को हुआ करती थीं, अब वो उन्हें महसूस नहीं होतीं। यह सब हकीम सुलेमान खान साहब की सही मार्गदर्शन की वजह से संभव हुआ। अब उनकी जिंदगी में पहले की तरह खुशियां लौट आई हैं। पहले की जिंदगी और अब की जिंदगी में उन्हें काफी बदलाव देखने को मिला है। आज वह अपने सभी काम खुद आसानी से कर पा रहे हैं।
मनीष जी के जीवन में आए ये बदलाव:-
- अब वह बिना किसी सहारे के आसानी से सीढ़ियाँ चढ़ और उतर लेते हैं।
- जमीन पर बैठकर डेढ़ घंटे बिना किसी खिंचाव के आराम से पूजा-पाठ कर लेते हैं।
- गोंद सियाह बना दर्द में इनके जीवन का सहारा।
आपको बता दें कि मनीष जी का कहना है कि जब से उन्होंने ‘गोंद सियाह’ का इस्तेमाल शुरू किया, तब से उनके घुटनों में ताकत महसूस होने लगी है। मनीष शर्मा जी हकीम सुलेमान खान जी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं, क्योंकि उनकी वजह से ही उनकी सालों पुरानी परेशानियों में राहत मिली है इसी के साथ वो हकीम जी को भगवान् का दर्जा भी देते है क्योंकि उनके जीवन में आये बदलाव का कारण हकीम जी की यूनानी बूटी ही है। इसके बाद अब वह और लोगों को भी सलाह देते हैं कि अगर उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी है तो वह हकीम जी की बूटी को अपनाएं। वह यही चाहते हैं कि जिस तरह से उन्हें आराम मिला है उसी तरह से और लोगों को भी आराम मिल सकें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
