बुढ़ापे में अगर परेशानियों का सामना करना पड़े तो जिंदगी आसान नहीं होती है ऐसे में बढ़ती तकलीफे आपके जीवन को और भी मुश्किल बना देती है, जरा सोचिए अगर बुढ़ापे में आप कमर दर्द के कारण उठ-बैठ नहीं पाएं, खड़े नहीं हो पाएं तो दूसरों के लिए बोझ बन जाते हैं। कमर दर्द आज एक मामूली समस्या बन गई है जो हर उम्र के लोगों को हो सकती है, जो लोग घंटो ऑफिस में बैठकर काम करते हैं उनके लिए भी कमर दर्द एक मुसीबत बन चुका है, वहीं बुढ़ापे में हड्डियां कमजोर होने और मांसपेशियों से जुड़ी तकलीफ बढ़ने की वजह से भी ये दिक्कत काफी बड़ी बन जाती है। ऐसी ही एक कहानी है मुंबई में रहने वाली कुलवंत कौर की जिन्होंने बुढ़ापे के साथ इस कमर दर्द को झेला यहां तक की नौबत ये आ गई कि उन्हें दूसरों पर मजबूरन निर्भर रहना पड़ा। हमारे जीवन में कभी-कभी हमें ऐसी परिस्थितियों का सामना अकेले ही करना पड़ता है, लेकिन कुछ लोग अपनी इच्छा-शक्ति और हौसले के साथ उन मुश्किलों को पार कर ही लेते हैं। आइये जानते हैं कि कैसे कुलवंत कौर जी ने कमर दर्द से राहत पाई और इतनी तकलीफें होने के बावजूद जिंदगी को आसान बनाया?
जानिए कमर दर्द से परेशान कुलवंत कौर की सच्ची कहानी?
ये प्रेरणादायक कहानी है मुंबई के अंधेरी वेस्ट, ओशिवारा में ट्रांसकॉन ट्रायम्फ सोसायटी में रहने वाली कुलवंत कौर की जिनकी उम्र 75 साल है, आप इन्हें देखकर इनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते क्योंकि दिखने में ये काफी फिट लगती है। कुलवंत जी पंजाब के जलंधर से हैं पर फिलहाल वह मुंबई शहर में रहती हैं। वह काफी सुलझी हुई महिला हैं ये उनके बातचीत के ढ़ग से ही पता लगाया जा सकता है। वह दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहती हैं। आपको बता दें इनका खुद का ज्वेलरी और सूट का होलसेल का काम था पर अब ये एक हाउसवाइफ हैं
और अपनी जिंदगी काफी खुशहाल तरीके से बिता रहीं हैं। इन्हें किरोशिया का काम करना काफी पसंद है पर बढ़ते कमर दर्द की वजह से इनके लिए ये काम करना भी काफी मुश्किल हो गया क्योंकि इसके लिए इन्हें घंटो एक जगह बैठकर ही काम करना पड़ता था। उनके पति तरसेम सिंह हुंडल मर्चेंट नेवी से रिटायर्ड हैं। वह भी अपनी पत्नी को तकलीफ में देखकर काफी दुखी थे क्योंकि घर की महिला अगर परेशान हो तो घर के किसी सदस्य का काम में मन नहीं लगता, वो कहते हैं न कि एक गृहणि पूरे घर की शोभा होती है शायद इसी वजह से कुलवंत जी के पति परेशान रहते थे। इतनी सारी परेशानियां होने के बावजूद भी इन्होंने बुढ़ापे में अपने हौसलों को बुलंद रखा और हार नहीं मानी।
कैसे बिताया कुलवंत जी ने कमर दर्द के साथ अपना मुश्किल समय?
कमर दर्द बढ़ने की वजह से कुलवंत जी को रीढ़ की हड्डी की तरफ काफी दर्द रहने लगा ये दर्द इतना बढ़ गया कि लंबे समय तक खड़ा रहना, उठना-बैठना भी इनकी परेशानी की वजह बन गया। बढ़ते कमर दर्द से परेशान कुलवंत जी ने कई सारे डॉक्टरों को दिखाया पर उन्हें कुछ समय के लिए आराम मिल जाता और फिर से वह दर्द वैसे ही होना शुरू हो जाता था। इसे देख परिवार वाले भी काफी घबरा गए कि आखिर क्या ही वजह है जो उनका ये दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में उन्होंने जब एक डॉक्टर से सलाह ली तो उन्होंने कुलवंत जी को ऑपरेशन कराने की सलाह दी पर कुलवंत जी के मन में ये डर था कि कहीं ऑपरेशन कराने के बाद वो थोड़ा बहुत चल भी पाती हैं या उठ-बैठ लेती हैं वो मुश्किल हो जाएगा। इसी वजह से उन्होंने ऑपरेशन कराने से साफ मना कर दिया।
कुलवंत जी के किसी संबंधी ने ऑपरेशन कराया था तो उनके लिए भी जिंदगी गुजारना काफी मुश्किल हो गया था। कुलवंत कौर के डर को समझते हुए डॉक्टर ने उन्हें ये भी सलाह दी कि अगर आप सही फैसला नहीं लेंगी तो शायद आपको घुटनों का दर्द भी झेलना पड़े,पर कुलवंत कौर जी ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया। वो कहते हैं न हर किसी के जीवन में अगर सुख है तो दुख भी है आता है बस जरूरी है उस समय हिम्मत के साथ काम करना। शायद कुलवंत जी को भी सही रास्ता मिलने वाला था क्योंकि भगवान भी यही चाहते थे कि वह इस बुढ़ापे में और परेशान न हो।
हकीम साहब के नुस्खे अपनाकर कुलवंत जी को बुढ़ापे में मिली दर्द से राहत
कुलवंत जी जब ऐसे ही रोजाना की तरह परेशानी में रहा करती तो एक दिन ऐसे ही अचानक से बैठे-बैठे उन्हें हकीम सुलेमान खान साहब के चर्चित शो सेहत और जिंदगी के बारे में विचार आया कि क्यों न एक बार हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को अपना लिया जाए क्योंकि कुलवंत जी हकीम जी से अपनी समस्या होने से पहले जुड़ी हुई थी। उन्होंने हकीम जी के हर प्रोग्राम में ये देखा था कि किस तरह से हकीम साहब लोगों की परेशानी में उनकी मदद करते हैं और ऐसे कई लोग भी होते हैं जो हकीम साहब के नुस्खों को अपनाते हैं औऱ उन्हें फायदा भी मिला है। इन्हीं सब बातों से प्रभावित होकर कुलवंत जी ने हकीम जी की बूटी अपनाने का सोच लिया और फिर बिना किसी देरी के उन्होंने ATIYA HERBS की वेबसाइट पर उपलब्ध गोंद सियाह को मंगवाया।
इसके बाद कुलवंत जी ने हकीम साहब के दिशा निर्देश अनुसार यूनानी बूटी का सेवन करना शुरु किया। इसका सेवन करने के बाद उन्हें दर्द में काफी राहत मिलती नजर आई। पहले जहां हमेशा वो सहारा लेकर चलती थी, उठ-बैठ नहीं पाती थी पर अब आसानी से अपने सारे काम कर लेती हैं। ये देख वह काफी खुश हो गई हैं, क्योंकि इतनी तकलीफें झेलने के बाद आखिरकार उनका कमर दर्द कम हो ही गया।
अब नहीं है इन्हें पहले की तरह कमर दर्द की परेशानी
75 साल की कुलवंत कौर जहां कमर दर्द के कारण उठ-बैठ नहीं सकती थी वो आज आसानी से अपने सारे काम बखूबी कर लेती हैं और ये सब हकीम साहब की मदद से ही संभव हो पाया है। आज उन्हें स्वस्थ देखकर उनके पति काफी खुश हैं क्योंकि उनसे अपनी पत्नी का दर्द देखा नहीं जा रहा था। वो यही चाहती हैं कि हकीम साहब इसी तरह लोगों की मदद करते रहें क्योंकि जिस तरीके से परेशानी के बारे में हकीम जी समझाते हैं शायद ही कोई समझा पाए। आज जो वो बेहतर और खुशहाल जीवन गुजार रही हैं उसका सारा श्रेय वह यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब को देती है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5416
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



