जिंदगी में जब घुटनों की तकलीफ बढ़ जाती है, तो रोजमर्रा जीवन काफी मुश्किल हो जाता है। घर के छोटे-छोटे कामों के लिए भी परिवार के लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसा ही कुछ परेशान करने वाला अनुभव उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के जटपुरा गाँव की रहने वाली कविता देवी जी का भी रहा है। कविता जी अपने परिवार के साथ गाँव में ही रहती हैं। उनका पूरा दिन घर के काम, खाना बनाने, साफ-सफाई और मवोशियों की देखरेख में बीतता था। सब कुछ सही चल रहा था, लेकिन बेटी की शादी से दो दिन पहले उनके पैरों में अचानक तेज दर्द होने लगा। शादी की व्यस्तता के कारण वो उस समय अपनी इस तकलीफ पर ध्यान नहीं दे सकीं और काम में लगी रहीं।
शादी निपटाने के बाद जब उनके घुटनों की तकलीफ बढ़ गई, तब उन्होंने अस्पताल जाकर दिखाया। तो पता चला कि उनके घुटनों की हड्डी चटकी हुई है और घुटने घिसने की दिक्कत शुरू हो चुकी है। चलने-फिरने या पैर मोड़ने पर उनके घुटनों से लगातार कट-कट की आवाजें आती थीं। धीरे-धीरे उनकी हालत ऐसी हो गई कि घुटनों के घिसाव की वजह से उनका अपने पैरों पर चलना-फिरना पूरी तरह बंद हो गया। राहत की उम्मीद में परिवार के लोग उन्हें मथुरा, आगरा और गंगापार के अलग-अलग जगहों में ले गए। वहाँ डॉक्टरों ने बोला घुटने पूरी तरह घिस चुके हैं और अब ऑपरेशन ही बचा है।
ऑपरेशन की बात सुनकर कविता जी काफी डर गईं और उदास रहने लगीं। इस वजह से वो करीब चार-पांच महीनों तक खाट पर ही पड़ी रहीं। जब भी वो उठने की कोशिश करतीं, सीधे खड़े होना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाता था। नौबत यहाँ तक आ गई कि घर की सीढ़ियां चढ़ने के लिए वो पैरों का इस्तेमाल नहीं कर पाती थीं, बल्कि उन्हें हाथों के सहारे घिसटकर ऊपर जाना पड़ता था। लेकिन कहते है न की डूबते हुए को भी तिनके का सहारा काफी होता है ऐसा ही कुछ कविता जी के साथ भी हुआ। जब वो हर तरफ से उम्मीद हार गई थी तब उन्हें मिला यूनानी का सहारा और तब से उनकी जिंदगी में काफी आराम हुआ पर ये जानने से पहले की उन्हें आराम कैसे मिला यह जानते है की आखिर उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
इन समस्याओं का करना पड़ा कविता जी को सामना।
- घुटनों को मोड़ने या चलने पर लगातार कट-कट की आवाजें आती थी।
- खाट से उठने और सीधे खड़े होने में इन्हें बहुत ज्यादा तकलीफ होती थी।
- सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए हाथों के सहारे चलना पड़ता था।
हकीम साहब से जुड़कर मिली राहत की नई उम्मीद…आखिर कैसे?
जब हर तरफ से निराशा ही हाथ लग रही थी, तब एक दिन खाट पर लेटे हुए कविता जी ने टीवी पर हकीम सुलेमान खान साहब का शो सेहत और जिंदगी देखा। इस शो में उन्होंने देखा कि कैसे घुटनों की तकलीफ से जूझ रहे लोग यूनानी बूटियों को अपनाकर अपनी जिंदगी आसान बना रहे थे। जिसे देख कर उन्हें भी लगा की अगर इतने लोगो को आराम मिल रहा है तो उन्हें क्यों नहीं मिल सकता, इसलिए कविता जी ने तुरंत शो में दिखाए गए नंबर पर फोन करके टीम से बात की। टीम ने उनकी पूरी बात को ध्यान से समझा और उन्हें गोंद सियाह का इस्तेमाल करने की सलाह दी। उन्होंने ATIYA HERBS की वोबसाइट से गोंद सियाह मँगवाया और बताए गए तरीके से रोज लेना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने हकीम साहब के घरेलू नुस्खे भी अपनाए और बहुत ही जल्द उन्हें अपनी समस्या में काफी आराम मिला, अब वो पहले की तरह न ही हाथों के सहारे सीढ़ियाँ चढ़ती है और न ही लंगडा कर चलती है, अब पहले की तरह उन्हें किसी के सहारे की जरूरत भी नहीं पड़ती है!
दर्द से राहत के बाद बिता रही हैं खुशहाल जीवन।
आपको बता दें घुटनों के दर्द से राहत मिलने के बाद उनकी पूरी जिंदगी ही बदल गई है। गोंद सियाह शुरू करने के बाद उन्हें धीरे-धीरे अपने शरीर में अच्छे बदलाव दिखने लगे। करीब तीन महीने लगातार इस्तेमाल करने से उन्हें अपनी तकलीफ में बहुत हद तक राहत मिल गई।
- अब वो बिना किसी सहारे के खुद सीधी खड़ी हो जाती हैं और आसानी से चलने लगती हैं।
- घर की सीढ़ियाँ अब वो आराम से चढ़-उतर लेती हैं।
- घर का सारा काम वो खुद कर लेती हैं।
- मवेशियों के गोबर का भारी तसला उठाकर ट्रॉली में डालने जैसा भारी काम भी अब वो आराम से कर लेती हैं।
आज कविता देवी जी अपने पैरों पर सही तरह से बिना किसी सहारे के चल रही हैं और अपने सारे काम खुद कर पा रही हैं। वो और उनका परिवार हकीम सुलेमान खान साहब का दिल से धन्यवाद करते हैं। इतना ही नहीं वो ये भी कहते हैं कि अगर हकीम साहब न होते तो शायद ही वो पहले की तरह स्वस्थ हो पाते। अब बस वह यही चाहते हैं कि जैसे उन्हें आराम मिला है वैसे ही और लोगों को भी आराम मिल सकें। हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
