कभी जिन कदमों में रुकने का नाम नहीं था, वही कदम एक समय घुटनों के दर्द की वजह से थमने लगे। घुटनों का दर्द आजकल एक मामूली समस्या बनती जा रही है। ऐसे में बढ़ती उम्र, पुरानी चोट, ज्यादा वजन या रोजमर्रा की भागदौड़ की वजह से घुटनों में दर्द, और चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है। कई बार यह समस्या धीरे-धीरे इतनी बढ़ जाती है कि सीढ़ियां चढ़ना, ज्यादा देर खड़े रहना या थोड़ी दूर चलना भी मुश्किल लगने लगता है। ऐसे में समय रहते घुटनों की परेशानी पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। ऐसी ही कहानी है दिल्ली के रहने वाले हयात राम आर्य जी की जो कि घुटनों के दर्द से काफी परेशान था। उनके लिए जीवन गुजारना काफी मुश्किल हो गया था पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दर्द को हराकर एक नई जिंदगी की शुरुआत की आइये जानते हैं उन्हें घुटनों के दर्द में आराम कैसे मिला और उन्होंने हकीम जी की कौन सी बूटी को अपनाया जिससे उन्हें फायदा मिला।
आखिर कौन है हयात राम आर्य जी?
दिल्ली के त्रिलोकपुरी (ब्लॉक 34) के रहने वाले हयात राम आर्य जी एक दयालु और सहनशील स्वभाव के व्यक्ति हैं वह हमेशा लोगों की तकलीफ में उनके साथ खड़े रहते हैं ये हम उनके स्वभाव से अंदाजा लगा सकते हैं। आपको बता दें हयात राम जी सेल अथॉरिटी ऑफ इंडिया के रिटायर्ड एग्जीक्यूटिव रह चुके हैं, पर अब वह घर पर ही अपना जीवन गुजार रहे हैं। इनकी कहानी उन तमाम लोगों के लिए एक बहुत बड़ी मिसाल और प्रेरणा है जो बढ़ती उम्र या किसी पुरानी चोट की वजह से घुटनों के दर्द और पैरों की भारी अकड़न से लगातार परेशान रहते हैं। एक समय ऐसा था जब 72 साल के हयात राम जी अपने घर और बाहर के सारे काम बेहद खुशी, फुर्ती और आसानी से खुद ही संभाला करते थे। सुबह से लेकर शाम तक पैदल चलना, बाजार जाना, घर की सीढ़ियां फटाफट चढ़ना-उतरना और फर्श पर बैठकर आराम से काम निपटाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का एक बहुत ही नॉर्मल हिस्सा हुआ करता था। लेकिन कुछ समय पहले उनकी जिंदगी में अचानक एक मुश्किल दौर शुरू हुआ वह घर के बाथरूम में अचानक पैर फिसलने की वजह से गिर पड़े। इस हादसे के कारण उनके घुटने में काफी चोट लग गई। शुरुआत में तो उन्हें लगा कि यह मामूली चोट या सूजन है जो थोड़े दिनों में खुद ही सही हो जाएगी, लेकिन देखते ही देखते इस चोट ने उनके घुटनों में तेज दर्द, सूजन का रूप ले लिया, जिसने उनकी पूरी लाइफस्टाइल को बदलकर रख दिया।
घुटनों के दर्द ने छीन ली चलने की उम्मीद…जानिए कैसे?
घुटनों की इस लगातार बढ़ती तकलीफ और जकड़न की वजह से हयात राम आर्य जी की डेली रूटीन काफी प्रभावित होने लगी थी और उनके लिए अपने रोज के छोटे-छोटे काम कर पाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। सबसे ज्यादा मुसीबत उन्हें घर की सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में आती थी। जब भी वह सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश करते थे, तो घुटने पर थोड़ा सा भी वजन पड़ते ही इतना तेज दर्द होता था कि उन्हें सीढ़ी की ग्रिल या पास की दीवार को अपने दोनों हाथों से कसकर पकड़ना पड़ता था। वह पूरा जोर लगाकर बहुत मशक्कत के साथ एक-एक कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ाते थे। यही नहीं, फर्श पर बैठना तो उनके लिए लगभग नामुमकिन सा हो गया था। जब भी वह जमीन पर बैठने की कोशिश करते, तो घुटने नीचे की तरफ मुड़ते ही नहीं थे। फर्श से उठते समय भी उन्हें अपने दोनों हाथों को जमीन पर टेककर शरीर का पूरा भार हाथों पर डालना पड़ता था। इसके अलावा, जब वह सोफे या बेड पर आराम करने के लिए लेटते थे, तब भी वह अपने दोनों पैरों को एक साथ सीधे नहीं रख पाते थे। दर्द की वजह से उन्हें बार-बार पैर आगे-पीछे करने पड़ते थे। वह अक्सर अपने कमरे में बैठकर यही सोचते रहते थे कि क्या वह कभी दोबारा पहले की तरह फुर्ती से चल-फिर पाएंगे। ऐसे में उन्होंने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि वह कभी पहले कि तरह बेहतर हो सकते हैं। उनका परिवार भी उनको देखकर काफी परेशान था, सभी को लगने लगा था कि शायद अब बढ़ती उम्र में इनके घुटने पहले की तरह नहीं हो पाएंगे।
कौन-कौन सी दिक्कतें बढ़ा रही थीं हयात जी की परेशानी?
- गिरने की वजह से घुटने में तेज दर्द, सूजन रहती थी।
- घुटने नीचे की तरफ मोड़ना आसान नहीं था, जिससे फर्श पर बैठना बेहद मुश्किल था।
- जमीन से उठते समय दोनों हाथों का सहारा लेना पड़ता था।
हकीम सुलेमान खान साहब से जुड़कर हयात जी को मिली उम्मीद की नई राह
हयात राम आर्य जी अपनी इस शारीरिक तकलीफ, घुटनों का दर्द दिन-ब-दिन बढ़ रहा था तो वो हताश रहने लगे थे, लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी जिसके बाद उन्हें मिली उम्मीद की नयी राह। उन्होंने टीवी पर हकीम सुलेमान खान साहब का मशहूर कार्यक्रम सेहत और जिंदगी देखना शुरू किया। उस शो में जब उन्होंने देश के अलग-अलग कोनों से आए लोगों के अनुभव सुने और देखे कि किस तरह लोगों को अपने दर्द में काफी आराम महसूस हो रहा है तो हयात राम जी के मन में भी एक नई उम्मीद जगी। उन्होंने बिना किसी देरी के शो में दिखाए गए नंबर पर कॉल करके हकीम जी की से संपर्क किया और अपने घुटनों के दर्द, चोट की पूरी समस्या अच्छे से बताई।
हकीम साहब ने उनकी पूरी स्थिति को अच्छी तरह समझने और जानने के बाद उन्हें गोंद सियाह लेने की सलाह दी,जिसके बाद हयात जी ने ATIYA HERBS की वेबसाइट से उन्होंने गोंद सियाह आसानी से मंगवाया। उन्होंने गोंद सियाह को पीसा और हकीम साहब द्वारा बताए गए सही तरीके और नियम का पालन करते हुए रोजाना सुबह और शाम एक-एक चुटकी गोंद सियाह का सेवन करना शुरू कर दिया। इसी के साथ कई और तकलीफों के लिए भी उन्होंने हकीम साहब के घरेलू नुस्खे भी आजमाएं। आपको बता दें गोंद सियाह के सेवन करने के कुछ ही समय बाद उनके घुटनों की सूजन में लगभग 50% तक आराम मिल गया। उनके घुटनों का दर्द में धीरे-धीरे आराम होने लगा। आज वो आसानी से अपने सभी काम कर लेते है पहले की तरह चौकड़ी मारकर काफी आसानी से बैठ जाते हैं।
राहत के बाद हयात राम आर्य जी की जिंदगी में आए ये बदलाव?
- अब बिना किसी दर्द या परेशानी के आसानी से फर्श पर बैठ जाते हैं ।
- जमीन से उठते समय अब उन्हें हाथों का सहारा लेने या फर्श पर जोर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।
- घर की सीढ़ियां बिना किसी दर्द या ग्रिल को पकड़े बहुत आराम से चढ़-उतर लेते हैं।
- अब वह बाहर आराम से टहलते हैं और कई तरह के काम भी कर लेते हैं।
मुश्किल दौर के बाद फिर आसान हुई इनकी जिंदगी
आज हयात राम आर्य जी की जिंदगी पहले के मुकाबले काफी आसान और बेहतर महसूस होती है। जिन रोजमर्रा के कामों को करने में कभी उन्हें घुटनों के दर्द की वजह से काफी परेशानी होती थी, आज वही काम वह खुशी और आत्मविश्वास के साथ खुद कर पा रहे हैं। घर में चलना-फिरना हो, फर्श पर बैठना हो, सीढ़ियां चढ़ना-उतरना हो या बाहर थोड़ी देर टहलना—इन सभी कामों को करने में अब उन्हें पहले जैसी परेशानी महसूस नहीं होती। वह बताते हैं कि इस बदलाव ने न केवल उनके शरीर को राहत दी, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी दोबारा मजबूत किया। आज वह पहले की तुलना में ज्यादा अच्छा महसूस करते हैं और अपने पैरों पर मजबूती से खड़े होकर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को बेहतर तरीके से जी पा रहे हैं। वह यही चाहते हैं कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें और उनका ये भी कहना है कि आज जो वो स्वस्थ जिंदगी गुजार पा रहे हैं वो हकीम सुलेमान खान साहब की मदद से ही संभव हो पाया है।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5
