आजकल कमर दर्द होना काफी मामूली बात हो गई है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत तरीके से वजन उठाना, या फिर रोज़मर्रा की गलत आदतें ये सब कमर में दर्द कर सकते हैं। कई बार दर्द हल्का होता है, लेकिन कभी-कभी ये इतना बढ़ जाता है कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। अगर समय पर ध्यान दिया जाए, तो कमर दर्द को आसानी से कम किया जा सकता है। ऐसी ही कहानी है हरगोविंद सिंह ठाकुर की जिनके लिए कमर दर्द एक बड़ी मुसीबत बनकर सामने आय़ा। उनकी ये परेशानी इस कदर बढ़ गई कि मानों उनकी जिंदगी में कोई उम्मीद ही न रही हो। वो कहते हैं न जिंदगी आपको कई बार ऐसी परेशानियों की तरफ ले जाती है जिसके बारे में हमने कभी सोचा नहीं होगा। ऐसा ही कुछ हुआ इनके साथ पर जब हर जगह से रास्ते बंद हो जाते हैं तो ऊपर वाला हमारे लिए हमेशा ढाल बनकर खड़ा रहता है और एक न एक दिन जीवन में बदलाव आता जरूर है और वही बदलाव आया हरगोविंद सिंह जी की जिंदगी में और ये बदलाव आया सिर्फ हकीम जी की मदद से। आपको बता दें हरगोविंद सिंह ठाकुर की सच्ची कहानी कई परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक प्रेरणा है। आखिर हो भी क्यों न जब इतने संघर्ष करने के बाद उनका जीवन फिर से खुशहाल जो हो गया है। आइये जानते हैं कि कैसे हकीम जी की मदद से इन्होंने अपने कमर दर्द पर जीत हासिल की और कौन सी बूटी अपनाई?
आखिर कौन है हरगोविंद सिंह जी?
64 वर्षीय हरगोविंद सिंह ठाकुर साहब गुजरात के अहमदाबाद के अमरायवाड़ी इलाके के सत्यम नगर में स्थित पत्रावली चाली के निवासी हैं। इनके स्वभाव को देखकर हम इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि इनका हमेशा से लोगों के साथ अच्छा व्यवहार रहा है। आपको बता दें हरगोविंद जी मुख्यतौर पर उत्तर प्रदेश के मैनपुरी के हैं और इन्होंने दिल्ली में पढ़ाई की है पर अपने परिवार के साथ अब वो गुजरात में ही रहते हैं उन्हें यहां रहते हुए लगभग 44 साल पूरे हो चुके हैं। परिवार के साथ बिता रहे खुशहाल जीवन को न जानें किसकी नजर लग गई कि उन्हें परेशानियों ने घेर लिया। दरअसल उन्होंने डायबिटीज की समस्या को झेला जिसकी वजह से उन्हें पैरों के 3 से 4 ऑपरेशन कराने पड़े, उनकी कमर झुक गई थी, कमर दर्द होने की वजह से लगातार 6 महीने तक वह बिस्तर से भी नहीं उठ पाए।
हरगोविंद जी के लिए दर्द और संघर्ष का समय गुजारना था मुश्किल
कमर दर्द से परेशान हरगोविंद जी के बुरे समय में उनकी बीवी ने उनकी पूरी सेवा की। एक दिन जब उनकी जीभ लड़खड़ाने लगी थी तो परिवार के सब लोग सोचने लगे थे कि अब वह नहीं बचेंगे। उन्होंने रात में ही उनके हाथ से गऊ दान तक करवा दिया था। दरअसल गुजरात में मृत्यु से पहले गऊ दान करना पुण्य का काम माना जाता है। कमर दर्द ने उनके जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। डॉक्टर ने उन्हें रीढ़ की हड्डी में इंफेक्शन बता दिया था। उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि वह हिलने-डुलने तक में असमर्थ हो गए थे। वे 6 महीने तक बिस्तर से नहीं उठ पाए, उनका शरीर इतना कमजोर हो गया था कि खड़े होते ही पैर कांपने लगते थे। वह बिस्तर में ही टॉयलेट करते थे। इस बीच उनकी पत्नी सुधा देवी ही उनका सहारा थी।
हरगोविंद जी की रीढ की हड्डी में इन्फेक्शन इतना ज्यादा बढ़ गया था कि उन्हें और उनके परिवार को उनके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी। डायबिटीज की वजह से डॉक्टर ऑपरेशन करने से मना कर रहे थे। परिवार ने यहां तक मान लिया था कि उनकी हालत में सुधार संभव नहीं है। कमर दर्द के साथ उन्हें पैरों में दर्द और सूजन भी थी जो समय के साथ बढ़ती चली गई। धीरे-धीरे पैरों का दर्द कब गंभीर समस्या में बदल गई उन्हें पता ही नहीं चला। एक दिन रात में अचानक उनके पैरों में इतना भयंकर दर्द हो गया कि अचानक ही उन्हें इमरजेंसी में अस्पताल जाना पड़ा जहां उन्हें समस्या के बारे में पता चला। पैर की स्थिति इतनी खराब हो गई कि डॉक्टरों को 3-4 बार ऑपरेशन करके मास निकालना पड़ा। जिसके बाद उन्हें पैरों के दर्द में कुछ राहत मिली लेकिन फिर कुछ ही दिनों के बाद उन्हें कमर के असहनीय दर्द ने घेर लिया। इस दर्द की वजह से वो पूरा-पूरा दिन बिस्तर पर ही पड़े रहते थे। वो कहते हैं न अगर समय बुरा हो तो अच्छा भी आता है शायद उनकी जिंदगी में भी अच्छा समय आने ही वाला था।
हरगोविंद सिंह जी की कहानी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदू :
- कमर दर्द के साथ डायबिटिज, पैरों का दर्द बन गया था मुसीबत
- पैरों का ऑपरेशन कराया पर फिर भी परेशानियां बनी रही
- 6 महीने तक बिस्तर पर दर्द की वजह से बिताया समय
- पत्नी के साथ और हकीम जी की बूटी की मदद से दर्द को किया कम
हकीम जी के यूनानी नुस्खे बने हरगोविंद जी का सहारा।
जब उनके परिवार वोले बिल्कुल उम्मीद छोड़ चुके थे तो एक दिन रोजाना की तरह टीवी देखते हुए उनकी नजर हकीम सुलेमान खान साहब के बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। जिसमें हकीम साहब बड़े ही विन्रम से लोगों को उनकी परेशानी के लिए बूटी बता रहे थे। लोगों को मिलते आराम को देखते हुए हरगोविंद जी और उनका परिवार काफी खुश हुआ तो उन्होंने सोचा की जब हर जगह प्रयास कर चुके हैं तो एक बार क्यों न यहां कोशिश कर ली जाए। फिर क्या था हकीम जी से संपर्क कर उन्होंने अपनी कमर की समस्या के बारे में बताया तो हकीम जी की सलाह पर उनकी टीम ने उन्हें गोंद सियाह खाने की सलाह दी। इसके बाद हरगोविंद जी ने इस खास बूटी को ATIYA HERBS की ऑफिशियल वेबसाइट से मंगवा लिया। कुछ दिनों तक सेवन करने के बाद ही उन्हें कमर दर्द में काफी फर्क महसूस होने लगा। अब हरगोविंद जी बिना सहारे के भी चलने लगे हैं और अपने सारे काम खुद से करने लगे हैं। वह खुद से नहाते हैं, बाथरूम जाते हैं, खाना खाते हैं और तो और बिना सहारे के वह गली में भी घूमने लगे हैं। आपको बता दें जब उन्हें फायदा मिलना शुरू हुआ तो उन्होंने अन्य दवाईयों को भी छोड़ दिया है और अब वह नुस्खों का नियमित सेवन करते हैं।
टूटी हुई उम्मीद को फिर से जगाया इस बूटी ने।
पहले जो उम्मीद हर कोई खो चुका था कि एक बार पहले की तरह वह स्वस्थ हो सकते हैं ये उम्मीद फिर जाग गई। उनके स्वस्थ होने की पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी पत्नी का साथ है क्योंकि पत्नी न होती तो आज उनकी सेवा कौन करता? और न ही वो पहले की तरह स्वस्थ हो पाते। उनके पड़ोसी बताते हैं कि हरगोविंद जी लगभग 2-3 साल तक खाट पर ही लेटे रहे और घर से बाहर निकलना बंद हो गया था। उनकी स्थिति इतनी खराब थी कि अगर बाहर लाना पड़ता तो गोद में उठाकर बाहर लाना पड़ता था। ऐसी स्थिति को देखकर तो हर कोई बस ये ही अंदाजा लगाता कि शायद अब वो बच नहीं पाएंगे पर हकीम जी की बूटी ने असंभव को संभव कर दिया। उनकी पत्नी सुधा देवी जी कहती हैं कि “हमने कभी नहीं सोचा था कि वह दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो पाएंगे” पर किसी ने सही कहा है जो इंसान किसी का बुरा नहीं करता भगवान भी उसका बुरा नहीं होने देते हैं।
आज हरगोविंद जी अपनी खुशहाल और स्वस्थ जिंदगी जो बिता रहे हैं उसका सारा श्रेय वह हकीम सुलेमान खान साहब को देते हैं और यही आशा करते है कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहे। ताकि जैसे उन्हें अपनी परेशानियों में आराम मिल पाया है वैसे ही और लोगों को भी आराम मिल सकें। वह अपने परिवार, रिश्तेदार के लोगों को भी हकीम जी के घरेलू नुस्खे अपनाने की सलाह देते हैं ताकि वो भी अपनी परेशानियों से राहत पा सकें।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5545
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



