घुटनों का दर्द बुढ़ापे में एक आम समस्या बन जाता है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ हड्डियाँ कमजोर हो जाती है लेकिन कुछ लोग घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान हो जाते हैं। बढ़ती उम्र में होने वाले घुटनों के दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे – शरीर का वजन बहुत ज्यादा होना जिस वजह से जोड़ों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, खानपान अच्छा न होने की वजह से पोषण की कमी होना, लंबे समय तक गलत पोश्चर में बैठे रहना या फिर कोई अन्य कारण भी घुटनों के दर्द का कारण हो सकता है। घुटनों का दर्द एक ऐसी समस्या है जो आपको जीवन भर परेशान कर सकती है अगर आपने समय रहते सही तरीका नहीं अपनाया हो।
ऐसी ही एक सच्ची कहानी है हाजिरा खान की, जो महाराष्ट्र के पुणे शहर में मोमिनपुरा के ज़ोहरा कॉम्प्लेक्स में रहती हैं। 63 वर्षीय हाजिरा खान पिछले पांच साल से घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान थीं। घुटनों के दर्द की वजह से उनका जीवन कष्टदायक हो गया था। जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए बोल दिया था। ऑपरेशन का नाम सुनकर वह काफी डर गई थी क्योंकि वह कई ऐसे लोगों को जानती थी जो ऑपरेशन कराने के बाद भी दर्द की समस्या से जूझ रहे थे। कहीं से कोई आराम मिलता नजर नहीं आ रहा था। पर फिर एक दिन उन्हें हकीम साहब के बारे में पता चला। आइये जानते हैं कि कैसे उनकी जिंदगी में बदलाव आया और उन्होंने कौन सा नुस्खा अपनाया जिससे उन्हें दर्द में राहत मिल गई।
जानिए कौन है हाजिरा खान?
महाराष्ट्र के पुणे शहर में मोमिनपुरा के ज़ोहरा कॉम्प्लेक्स में रहने वाली 63 साल की हाजिरा जी काफी दयालु स्वभाव की महिला है लोगों की मदद करना उन्हें काफी अच्छा लगता है। इस बात का अंदाजा हम उनके स्वभाव से लगा सकते हैं। उनके जीवन में सबकुछ सही चल रहा था पर न जाने कहां से घुटनों का दर्द उनके लिए मुसीबत बनकर सामने आया। जिसके बाद मानों उनकी जिंदगी ही पूरी ही बदल गई हो। वो कहते हैं न जीवन में दुख सुख बना रहता है शायद उनके जीवन में भी कुछ ऐसा ही था। अपनी इस परेशानी की वजह से उन्हें कई सारी तकलीफों का सामना भी करना पड़ रहा था।
हाजिरा जी के जीवन में घुटनों के दर्द का बढ़ता प्रभाव
घुटनों के दर्द की वजह से हाजिरा जी को उन्हें उठने-बैठने, सीढ़ियां चढ़ने, और चलने-फिरने में परेशानी होने लगी थी। घुटनों का दर्द उनके लिए एक गंभीर समस्या बन चुका था। पाँव उठाते ही उनके घुटनों में असहनीय दर्द होता था, घुटनों में हमेशा सूजन रहती थी और हर कदम पर घुटनों में कट-कट की आवाज आती थी। जिस वजह से घर के छोटे-मोटे काम करना भी उनके लिए मुश्किल हो गया था। यहां तक कि बाहर जाना या बाथरूम तक पहुंचना भी उनके लिए एक चुनौती बन चुका था। बाथरूम तक जाने के लिए भी दीवार का सहारा लेना पड़ता था। दिन-प्रतिदिन दर्द बढ़ता ही जा रहा था इसलिए वह दर्द को कम करने के लिए पेन किलर खाने के लिए मजबूर हो गई थीं लेकिन इससे उन्हें उतने ही समय के लिए राहत मिलती थी जब तक इसका असर रहता था, नहीं तो असर जाते ही घुटनों में फिर से दर्द होने लगता था।
जब उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने बताया कि उनके घुटने घिस गए हैं, ऑपरेशन करके घुटने बदलने पड़ेंगे। हाजिरा जी ने घुटनों का ऑपरेशन कराने से मना कर दिया क्योंकि उनकी एक सहेली ने घुटनों का ऑपरेशन कराया था और ऑपरेशन के बावजूद भी उनकी सहेली को टेड़ा पाँव करके चलना पड़ता है। इसलिए हाजिरा जी ऑपरेशन कराने की बजाय दवाइयों के सहारे अपनी जिंदगी काटने लगी। लेकिन वो कहते हैं न कि अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो एक दिन जरूर मिल जाती है। हाजिरा जी के साथ भी यही हुआ। पूरे 4-5 साल तक घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान रहने के बाद एक दिन उन्हें जोड़ों के दर्द में सबसे कारगर बूटी गोंद सियाह के बारे में पता चला।
हकीम सुलेमान खान साहब बने उम्मीद की किरण।
हाजिरा जी की जिंदगी में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब वह यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब से जुड़ी। दरअसल हाजिरा जी लंबे से समय से हकीम सुलेमान खान साहब का प्रोग्राम सेहत और जिंदगी देखती आ रही थी। इस प्रोग्राम में उन्होंने अनेक ऐसे लोगों को सुना जो सालों से जोड़ों के दर्द से परेशान थे और हकीम सुलेमान खान साहब के बताए हुए यूनानी नुस्खे अपनाने के बाद जोड़ों के दर्द से राहत पा चुके थे। इस बीच हाजिरा जी ने कई बार हकीम साहब को कॉल करने की कोशिश की लेकिन उनकी बात नहीं हो पाई। लगभग कई साल तक परेशान होने के बाद एक दिन उनका नंबर लग गया। हाजिरा जी ने अपनी सालों पुराने घुटनों के दर्द की समस्या बताई तो उन्हें हकीम साहब की तरफ से जोड़ों के दर्द में कारगर बूटी गोंद सियाह का सुबह-शाम सेवन करने की सलाह दी गई। हाजिरा जी ने हकीम साहब की ऑफिशियल वेबसाइट ATIYA HERBS से गोंद सियाह मंगा ली और सेवन करना शुरू कर दिया।
जैसे ही हाजिरा जी ने गोंद सियाह का सेवन शुरू किया तो शुरुआत में दर्द कम होने की जगह और ज्यादा बढ़ गया। लेकिन उन्होंने हकीम साहब से ये बात सुन रखी थी की अगर शुरुआत में दर्द बढ़ता है तो घबराएं नहीं बल्कि इसका सेवन जारी रखें। हाजिरा जी ने ऐसा ही किया जिससे धीरे-धीरे उन्हें राहत मिलने लगी। गोंद सियाह के सेवन के एक-दो महीने में ही उन्हें घुटनों के जोड़ में मजबूती और दर्द में कमी महसूस होने लगी। एक साल तक लगातार गोंद सियाह के सेवन के बाद अब आलम ये है कि हाजिरा जी को घुटनों के दर्द में लगभग 80% आराम मिल गया जिससे उनकी जिंदगी पहले की अपेक्षा बहुत ज्यादा आसान हो गई है। एक साल पहले जहां वह उठने-बैठने में असमर्थ थीं, वहीं अब वह बिना किसी सहारे के घर के सारे काम कर सकती हैं। अब उनका कहना है कि इस बूटी ने उन्हें ऑपरेशन से बचा लिया और उनकी जिंदगी में एक नई उम्मीद और ऊर्जा भर दी है। पहले वह बिस्तर पर लेटी रहती थीं और बहु से खाना मंगवाती थीं लेकिन अब वह खुद किचन में जाकर खाना खा सकती हैं और बना भी सकती हैं हाल ही में जब उनकी बहु की डिलीवरी हुई तो घर का पूरा काम हाजिरा जी खुद करती थी, घर का काम करते हुए उन्हें किसी भी तरह की तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ा। हकीम जी की बूटी से उनका जीवन एकदम बदल चुका है, उनका आत्मविश्वास और कार्यक्षमता पहले से कहीं अधिक बढ़ चुके हैं। अब हाजिरा जी खुद अपनी देखभाल करती हैं।
कहानी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु-
- घुटनों के दर्द की वजह से दीवार के सहारे चलने को हुई मजबूर
- जब हर जगह से हुई नाउम्मीद तब हकीम जी की बूटी बनी सहारा
- घुटनों के दर्द के साथ शुगर में भी मिला यूनानी बूटी से फायदा
- चलना-फिरना, उठना-बैठना अब आसानी से हुआ मुमकिन
गोंद सियाह के सेवन से घुटनों के असहनीय दर्द में राहत मिलने के बाद हाजिरा जी को हकीम सुलेमान खान साहब के यूनानी नुस्खों पर भरोसा हो गया। उन्होंने अपनी शुगर की समस्या के लिए भी हकीम साहब के यहाँ से जैतून का सिरका मंगाया जिससे उन्हें शुगर की समस्या में भी बहुत राहत मिल गई है। अब उन्हें या फिर उनके परिवार में किसी को कोई भी तकलीफ होती है तो वह हकीम साहब के नुस्खों का ही इस्तेमाल करती हैं। यूनानी बूटी ने उन्हें ऑपरेशन से बचाने में भी मदद की और उनका दर्द कम किया। यह सब उनके विश्वास का नतीजा है।
आज हाजिरा जी अपनी खुशहाल और स्वस्थ जिंदगी जो बिता रहे हैं उसका सारा श्रेय वह हकीम सुलेमान खान साहब को देते हैं और यही आशा करती है कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहे। वह दूसरे लोगों को भी यहीं सलाह देती है कि उन्हें अगर कोई भी समस्या है तो एक बार जरूर हकीम जी के घरेलू नुस्खों को जरूर आज़माकर देखें। हाजिरा जी ने खुद पर और हकीम साहब के नुस्खों पर विश्वास रखा और अपने दर्द को कम किया, यही वजह है कि आज वह एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जी रही हैं।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



