कमर हमारे शरीर का वो महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हर काम में हमारा साथ निभाता है—चाहे फिर चलना हो, दौड़ना हो, बैठना हो, या सोना। लेकिन जब कमर दर्द अपनी पकड़ बना ले, तो जीवन ठहर-सा जाता है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, घंटों ऑफिस में बैठे रहना, गलत जीवनशैली कमर दर्द जैसी समस्या को आम बना रहे हैं। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, कमर दर्द हर उम्र के लोगों को परेशान कर रहा है। अगर कमर का दर्द किसी को हो जाए तो यह जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर सकता है। आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति की कहानी सुनाने जा रहे हैं, जिन्होंने सालों-साल कमर के असहनीय दर्द को झेला और उनकी हालत ऐसी हो गई थी कि उठने-बैठने, बाथरूम तक जाने में बच्चों का सहारा लेना पड़ता था, अपना काम छोड़कर बिस्तर पर लेटने के लिए मजबूर हो गए थे। जब कहीं से कोई आराम महीं मिला तो उन्होंने सोच लिया था कि अब आगे की जिंदगी इसी तरह दर्द में बीतेगी। लेकिन फिर उनके जीवन में हकीम साहब की बूटी सहारा बनी तो आइए जानते हैं, आखिर उनकी तकलीफ कैसे कम हुई?
गोपाल कृष्ण शर्मा जी के जीवन में कैसे शुरू हुआ कमर दर्द का संघर्ष?
गोपाल कृष्ण शर्मा जी, जिनकी उम्र 52 साल है, वह पटना के बेगमपुर, चैनपुरा के रहने वाले हैं। पेशे से वह एक ट्रक ड्राइवर हैं, उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक लड़का और एक लड़की है, अभी दोनों बच्चों की पढ़ाई चल रही है। 16 सालों से ट्रक ड्राइविंग करके अपने परिवार को पालने वाले गोपाल कृष्ण शर्मा जी का परिवार बेहद आसान और एक सामान्य जीवन जी रहा था। उनके जीवन में सब कुछ सही चल रहा था। लेकिन तीन से चार साल पहले उनके साथ ऐसा हुआ जिसने उनकी दुनिया पूरी को तरह से बदलकर रख दिया। एक दिन ड्राइविंग करते समय उन्हें कमर में हल्का दर्द महसूस हुआ जो धीरे-धीरे बढ़ता गया और उनकी हालत ऐसी हो गई कि रोजमर्रा के काम करना तक मुश्किल हो गया था। टॉयलेट जाने से लेकर सोने तक, सब कुछ दर्द से भरा हुआ था।
दर्द इतना बढ़ गया था कि वो पूरी रात अलग-अलग तरीकों से तकिये का सपोर्ट लेते रहते थे। झुक न पाने की वजह से वह कोई भी काम नहीं कर पा रहे थे। थोड़ा सा भी वजन उठाना उनके लिए मुश्किल हो गया था। उन्होंने 6 महीने के लिए सारे काम छोड़कर डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। कमर दर्द की वजह से उनका ज्यादातर समय बेड पर ही गुजरने लगा। बिस्तर पर लेटे-लेटे उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की क्या करें और क्या न करें? क्योंकि काम बंद होने की वजह से पैसा आना बंद हो गया था, ऊपर से उनकी परेशानी भी बढ़ रही थी। ऐसे में उनके लिए जीवन गुजारना आसान नहीं था।
हकीम सुलेमान खान साहब से इनका जुड़ना कैसे हुआ? जानिए
गोपाल कृष्ण शर्मा जी को उम्मीद की एक किरण उस समय दिखाई दी जब एक दिन लेटे-लेटे टीवी के चैनल बदलते समय उनकी नजर यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब के एक शो सेहत और जिंदगी पर पड़ी। इस शो में उन्होंने कमर और जोड़ों के दर्द से परेशान कई लोगों को देखा जो हकीम सुलेमान साहब से जुड़कर, उनकी यूनानी बूटी अपनाकर दर्द में राहत पा चुके थे। हकीम साहब के बारे में और अधिक जानने के लिए गोपाल जी ने यूट्यूब पर सर्च किया तो उन्हें हकीम साहब की कई वीडियो मिली, जिसमें कई लोग खुद अपनी कहानी सुनाकर बता रहे थे कि उन्हें हकीम जी के किस नुस्खे से दर्द में फायदा मिला। कई सारे लोगों को स्वस्थ होते देखा तो उन्हें लगा क्यों न एक बार हकीम साहब की बूटी को अपना लिया जाए क्योंकि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो कहीं न कहीं भगवान आपकी मदद कर ही देता है शायद उनके साथ भी ऐसा ही कुछ था।
अनेक लोगों को हकीम जी के नुस्खों से फायदा मिलते देख, गोपाल जी ने स्क्रीन पर दिखाए गए नंबर पर संपर्क किया और अपनी कमर दर्द की समस्या के बारे में बताया। हकीम जी ने उनकी समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद कमर के दर्द में सबसे कारगर बूटी गोंद सियाह का सेवन करने की सलाह दी। जिसके बाद बताए गए निर्देशानुसार गोपाल जी ने हकीम साहब की ऑफिशियल वेबसाइट ATIYA HERBS से इस बूटी को मंगाया और इसका सेवन करना शुरू कर दिया। आपको बता दें उन्हें कुछ समय बाद ही कमर दर्द में इतनी राहत मिली कि वह फिर से अपने काम करने लगे।
कमर दर्द में आराम मिलने के बाद रहीं इनकी ऐसी स्थिति
हकीम जी की मदद से गोपाल जी फिर से अपने सभी काम करने लगे हैं, वह आसानी से बाइक चलाते हैं। थोड़ा-सा भी न झुक पाने वाले गोपाल जी आसानी से रोजाना झुककर झाड़ू लगाते हैं। कमर दर्द की वजह से थोड़ा सा भी वजन न उठा पाने वाले गोपाल जी वजनदार साइकिल को दोनों हाथों से ऊपर उठा लेते हैं, वो भी बिना किसी दर्द के। हकीम साहब के नुस्खों के सेवन के बाद उनका जीवन पहले जैसा स्वस्थ, और खुशहाल ही नहीं हुआ है बल्कि ऊर्जा से भर गया है। आज जो वो खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं ये हकीम साहब की वजह से ही संभव हो पाया है। आज उनका परिवार भी अपनी अन्य समस्याओं के लिए हकीम जी के घरेलू नुस्खों को अपनाता है ताकि जिस तरह से गोपाल जी को आराम मिल पाया है उसी तरह से उन लोगों को भी आराम मिल सकें।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



