कभी-कभी कुछ परेशानियां हमारे जीवन को दर्द और तकलीफ में डाल देती हैं जिससे हमारी जिंदगी बहुत कठिन हो जाती है। जब हमारे साथ ऐसी कोई परेशानी होती है और हजार कोशिशों के बावजूद उस दर्द और तकलीफ से राहत नहीं मिलती है तो ऐसे में अच्छी-खासी जिंदगी भी नरक बन जाती है। ऐसी ही कहानी है लखनऊ के रहने वाले गिरीश चंद दुबे जी की जिनके लिए कमर दर्द और पैरों का दर्द झेलना काफी मुश्किल हो गया। उन्होंने आसपास के इलाके में कुछ डॉक्टरों को दिखाया लेकिन उतने समय के लिए ही आराम लगता था जब तक असर रहता था। नहीं तो दर्द जाते ही उनकी तकलीफ फिर से शुरू हो जाती थी। अंततः थक-हारकर उन्हें ऐसा लगने लगा था कि शायद वो पहले कि तरह स्वस्थ और बेहतर नहीं हो पाएंगे। चलिए जानते हैं इनकी दर्दभरी कहानी के बारे में और ये भी जानेंगे कि आखिर कैसे हकीम जी की बूटी से उन्हें फायदा मिला?
जानें गिरीश चंद दुबे की सच्ची कहानी ?
लखनऊ के रहने वोले गिरीश चंद दुबे ग्राऊंड वाटर इंजीनियर से रिटार्यड हैं। वह अपने क्षेत्र के काफी सम्मानित व्यक्ति हैं। साथ ही उनकी उम्र 68 साल हैं। गिरीश जी के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे, एक बहु, एक पोती और एक बेटी है। उनकी बेटी की शादी हो चुकी है। इसी जिम्मेदारियों के बीच गिरीश जी का जीवन बीत रहा था। पर सबका ख्याल रखने वाले गिरीश जी आज खुद परेशानी में आ जाएंगे ऐसा किसी ने सोचा नहीं था। दरअसल कमर दर्द और पैरों का दर्द उनके लिए बड़ी परेशानी बन गई। इसकी वजह से उन्हें चलने-फिरने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। उनका जीवन ऐसे में बिल्कुल आसान नहीं था।
इन्हें कई सारी कठिनाईयों का करना पड़ा सामना
बढ़ती उम्र में कमर दर्द और पैरों में दर्द की समस्या से वह काफी परेशान थे। उन्होंने सोचा कि यह परेशानी अब जिंदगी भर उनके साथ रहेगी। अब बचा हुआ सारा जीवन उनका बिस्तर पर ही निकलेगा। गिरीश जी यही सोचते रहते थे कि ना जाने कब पैरों के दर्द और कमर के दर्द से राहत मिलेगी या इसी तरह पूरा जीवन गुजारना पड़ेगा। इसी उधेड़बुन में वे बस अपने दिन काट रहे थे। दवाइयां लगातार चल रही थीं। लेकिन क्या ही फायदा, उन दवाओं से कुछ ज्यादा आराम नहीं लग रहा था। गिरीश जी को अपने कमर और पैरों के दर्द के कम होने की कोई उम्मीद की राह नहीं दिखाई दे रही थी। वे भी अब इस बात को समझ चुके थे कि ये उम्र का पड़ाव ही है जो उनपर किसी चीज का असर नहीं दिखा रहा था। वो कहते हैं न जिंदगी का कोई भरोसा नहीं किया जा सकता है क्योंकि अगर सुख है तो दुख भी आएंगे और दुख है तो सुख भी आएंगे शायद गिरीश जी के भी दुखों के दिन चल रहे थे बस जरूरी था ऐसे समय में खुद का ख्याल रखना और हिम्मत बनाएं रखना कि एक न एक दिन तो सब सही हो ही जाएगा। बस इसी उम्मीद पर वह अपने दर्द को झेलते हुए दिन काट रहे थे। शायद किसी ने सही कहा है कि ऊपर वाला भी आपकी तकलीफों को देखते हुए कोई न कोई रास्ता तो आप तक भेज ही देता है। इसी तरह गिरीश जी के जीवन में भी एक नया रास्ता नजर आया और वो थे हकीम साहब, जिनकी मदद से एक उम्मीद की किरण जागी।
गिरीश जी के जीवन से जुड़ी कुछ खास परेशानियां:
- बुढ़ापे में दर्द सहना इनके लिए था काफी मुश्किल।
- कमर दर्द और पैर दर्द की वजह से वह झुकने और उठने-बैठने में असमर्थ थे।
- रोजमर्रा के कार्यों में सहारे की जरूरत पड़ती थी यही थी बड़ी परेशानी।
हकीम साहब के नुस्खों से मिली राहत की उम्मीद, आखिर कैसे?
उनकी जिंदगी में एक फरिश्ता आया और इनकी सहायता से उनके कमर दर्द और पैरों के दर्द में काफी आराम मिलना शुरू होने लगा। उनकी जिंदगी में वह फरिश्ता और कोई नहीं वो थे यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब। गिरीश जी अपना अधिकतर समय घर पर ही बिता रहे थे। इसी बीच वे हकीम सुलेमान खान जी से टीवी के माध्यम से जुड़े। टीवी देखते हुए उन्होंने एक दिन हकीम सुलेमान खान साहब का बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी देखा।
उनकी पत्नी और गिरीश जी को हकीम साहब पर विश्वास सा होने लगा क्योंकि इस प्रोग्राम में हकीम जी लोगों की काफी मदद कर रहे थे और उनकी यूनानी बूटी से लोगों को काफी फायदा भी मिल रहा था। बस फिर क्या था जब उन्हें हकीम साहब ने दर्द में कारगर बूटी गोंद सियाह खाने की सलाह दी तो गिरीश जी ने बिना किसी देरी के इसे ATIYA HERBS से इसे ऑर्डर कर दिया। इसके बाद गिरीश जी ने इसका इस्तेमाल वैसे ही किया जैसा कि हकीम साहब ने बताया था। इसके बाद पूरे नियमों के साथ इसका सेवन शुरू कर दिया। जिसका परिणाम यह निकला कि उनके पैरों के दर्द में काफी आराम मिला। अब उन्हें पहले के मुकाबले 80 फीसदी आराम हुआ है।
गिरीश जी बताते हैं कि हकीम जी की यूनानी बूटी अपनाने के बाद कुछ ही समय में उनके पैरों के दर्द और कमर के दर्द में उन्हें फर्क महसूस होने लगा। इससे उनकी जिंदगी में भी रोशनी की एक किरण दिखाई देने लगी। अब गिरीश जी रोजाना हकीम साहब का शो सेहत और जिंदगी देखने लगे हैं। लेकिन उन्होंने भी कभी ये सोचा नहीं था कि उनकी जिंदगी में भी कुछ ऐसा होगा जिससे उनकी पूरी की पूरी जिंदगी ही बदल जायेगी। आपको बता दें गिरीश जी को पेट की समस्या भी थी जिसके लिए उन्होंने जैतून के सिरके का भी सेवन किया इसके अलावा वो और उनका परिवार अपनी अन्य समस्याओं के लिए हकीम जी के घरेलू नुस्खों को भी अपनाते हैं। गिरीश जी बताते हैं कि उनकी उम्र के उनके दोस्त और रिश्तेदार किसी ना किसी समस्या से परेशान रहते हैं और चलने फिरने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके विपरित गिरीश जी स्वस्थ और सेहतमंद हैं और अब किसी भी प्रकार की समस्या को अपने आस-पास भटकने तक नहीं देते हैं। इतनी उम्र होने के बाद भी अब वे दूसरे पर निर्भर नहीं रहते हैं। यही उनके स्वस्थ होने का नतीजा है और ये सिर्फ और सिर्फ हकीम जी की मदद से ही संभव हो पाया है।
कहानी से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:-
- गोंद सियाह के सेवन से कमर और पैरों के दर्द में 80% मिला आराम।
- अब सीढ़ियाँ चढ़ने-उतरने में हैं सक्षम, गिरीश जी नहीं है सहारे के मोहताज।
- पहले छोड़ दी थी बेहतर होने की उम्मीद लेकिन यूनानी बूटी रही मददगार साबित।
हकीम जी की वजह से संभव हुई बेहतर जिंदगी
हकीम साहब जी के बताए गए नुस्खों का सेवन करने के बाद आज गिरीश चंद दुबे जी एक सेहतमंद और स्वस्थ जीवन बिता रहे हैं। वे अपने इस सुखी जीवन का सारा श्रेय हकीम सुलेमान खान जी के देते हैं। गिरीश जी ने हकीम साहब को भगवान का दर्जा देते हुए कहा है कि उनकी पर्सनेलिटी और उम्र के पड़ाव को देखते हुए वे हमेशा सभी की मदद करते रहते हैं। साथ ही यह भी बताया कि वह उनपर भगवान के जितना ही भरोसा करते हैं। भगवान के बाद वे हकीम साहब को ही मानते हैं। गिरीश जी यही चाहते हैं कि हकीम जी लोगों की इसी तरह मदद करते रहें। ताकि जैसे उन्हें आराम मिला है वैसे ही और लोगों को भी आराम मिल सकें। आपको बता दें हकीम साहब पर उनका और उनके पूरे परिवार का अटूट विश्वास बना हुआ है। गिरीश जी हकीम सुलेमान खान साहब का तहे दिल से धन्यवाद करते हैं और अगर उन्हें कोई भी व्यक्ति किसी तरह के दर्द से परेशान दिखता है तो हकीम साहब के नुस्खों का सेवन करने की सलाह जरूर देते हैं।
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रख सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5545
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



