कमर दर्द हो या, पीठ के नीचले हिस्से में दर्द या फिर पीठ के ऊपरी हिस्से में दर्द। लोग इस दर्द से काफी परेशान रहते हैं। कई लोग सोचते हैं कि कमर दर्द या पीठ दर्द सिर्फ बुढ़ापे में होता है, लेकिन यह सच नहीं है। यह किसी भी उम्र में होने वाली तकलीफदेह समस्या हो सकती है। आज की बदलती जीवनशैली कमर दर्द का कारण बन रही है। इस परेशानी में इंसान सही से झुक नहीं पाता है, सीधा खड़ा नहीं रह पाता है। ऐसी ही कहानी है बुजुर्ग महिला गंगा देवी जी की। जिनके लिए कमर दर्द एक परेशानी बन गई।
आपको बता दें कि इन्हें कमर दर्द ने इस कदर लाचार बना दिया था कि ये खुद से अपना कोई काम नहीं कर पाती थी, लेकिन फिर इन्हें यूनानी का साथ मिला और इनका जीवन बदल गया। बुढ़ापे में यह इतनी सेहतमंद हो गई कि ये खुद से अपने सभी काम करने लगी और सही से चलने लगी, लेकिन यह कैसे संभव हो पाया आइए जानते है इनकी सच्ची कहानी के बारे में?
मुंबई के चेंबूर के पास हसीना नगर चॉल में रहती है 70 साल की बुजुर्ग महिला गंगा देवी जी। वह काफी दयालु स्वभाव की महिला हैं ये उनके बातचीत के ढंग से भी पता चलता है। परिवार की बात करें तो उनका पूरा परिवार उनके साथ रहता है। परिवार में उनके दो बेटे, एक बहू और एक पोता है। सभी हंसी खुशी जीवन जी रहे थे कि न जानें इस खुशी के माहौल में परेशानी कहां से सामने आ गई। उनके परिवार पर तब मुसीबत आ पड़ी जब उनकी घर की सबसे बुजुर्ग महिला गंगा देवी जी को कमर दर्द जैसी समस्या ने घेर लिया। वही अगर वह एक बार बैठ जाती थी तो उन्हें फिर से खड़े होने में दिक्कत आती थी। ऐसे में उनकी कमर में झटका सा लगता था। जिस वजह से उनकी तकलीफ काफी बढ़ जाती थी। इस परेशानी को देखते हुए अब बस घर परिवार के लोग ही उनका सहारा था। उनकी हालत इतनी खराब हो गई थी कि उन्हें टॉयलेट भी पकड़ कर ले जाया करते थे। बुढ़ापे में जब परेशानी बढ़ जाए तो जिंदगी जीना आसान नहीं होता शायद ऐसे परिस्थिति गंगा देवी जी की भी थी।
गंगा देवी जी काफी बुजुर्ग महिला है घर की सबसे बड़ी होने के नाते वह इस सोच में रहती थी कि वह किस तरह खुद को सही कर सकती है। वह कब दूसरों के सहारे के बिना चल सकेंगी। उनके लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने तो जीने की उम्मीद खो दी थी, लेकिन उनकी बहू पार्वती ने हिम्मत नहीं हारी। गंगा देवी जी बताती है कि वह 3 साल तक बैड पर रही। उस समय उनकी सारी सेवा उनकी बहू ने की थी। उनकी बहू बताती है कि उन्होंने अपनी सास गंगा देवी की खूब सेवा की और बहुत ध्यान रखा। उन्होंने ही गंगा देवी को कई अस्पतालों में दिखाया और हार नहीं मानी। उन्होंने हमेशा ही गंगा देवी को उम्मीद दिखाई कि वह और लोगों की तरह चल-फिर सकती है। अपने काम खुद से कर सकती हैं। आज नहीं तो कल ईश्वर उनकी ज़रूर सुनेगा और ऐसा हुआ भी गंगा देवी जी की बहू की उम्मीद रंग लाई और ईश्वर ने उनकी सुन ली। वो कहते हैं न अगर बुरा वक्त है तो अच्छा वक्त भी आता है शायद गंगा देवी जी का अच्छा वक्त आने ही वाला था।
एक दिन जब सब आराम कर रहे थे और टी.वी चल रखा था तो गंगा देवी जी के पोते सूरज ने टी.वी पर सबसे चर्चित शो सेहत और जिंदगी को देखा और अपनी मम्मी से कहा कि हमें भी मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब की जड़ी-बूटी दादी के लिए मंगानी चाहिए फिर क्या था, पार्वती जी ने बिना देर लगाएं स्क्रीन पर दिखाएं नंबर पर कॉल लगाया और हकीम साहब की टीम को अपनी सास की परेशानी के बारे में बताया। हकीम साहब की टीम ने उनकी समस्या को सही से समझते हुए गोंद सियाह खाने की सलाह दी। फिर गंगा देवी जी के बेटे ने देर ना लगाते हुए ATIYA HERBS से गोंद सियाह ऑर्डर करके मंगा लिया इसके साथ टी.केयर कैप्सूल भी मंगवाए।
थोड़े दिन ही गोंद सियाह खाने से गंगा देवी जी को अपनी तकलीफ में आराम मिलना शरू हो गया। उन्होंने कहीं ना कहीं इससे फायदा मिलता दिखने लगा। इसके बाद उन्होंने अपनी अन्य परेशानियों के लिए भी हकीम साहब के घरेलू नुस्खों को अपनाना शुरू किया। जिससे उनकी परेशानी कम होनी शुरू हो गई और साथ ही अब वह पहले से खुद को सेहतमंद महसूस करने लगी।
अब पार्वती जी बताती है कि उनकी सास गंगा देवी जी अपने सारे काम खुद कर लेती है साथ ही वह बिना किसी सहारे के सीढ़ियां चढ़कर मंदिर चली जाती है साथ ही, रोजाना जूस की दुकान तक जूस पीने भी वह अकेले चली जाती है। पहले जूस उनके घर तक पहुंचाया जाता था, लेकिन अब वह खुद ही आ जाती है। गंगा जी को अब किसी तरह का कमर दर्द नहीं सताता है। वह हकीम साहब के लिए यही कहती है कि जैसे हकीम जी ने मेरी मदद की वैसे ही वह सभी की मदद करें और स्वस्थ रहे। लंबे समय तक बिस्तर पर पड़े रहने के बाद आज उनका जीवन फिर से खुशहाल हो पाया है और ये सब हकीम जी की मदद से ही संभव हो पाया है। इसलिए गंगा देवी जी अपनी बेहतर जिंदही का सारा श्रेय यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब को देती है और उनका तेह दिल से शुक्रिया अदा करती है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
गोंद सियाह क्या है?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गोंद सियाह कैसे मिलता है और यह देखने में कैसा होता है। यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्या है। इसके कालस्कंध (संस्कृत) ग्राम, तेंदू। यह समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। यह एक मध्यप्राण का वृक्ष है जो अनेक शाखाओं प्रशाखाओं से युक्त होता है। गोंद सियाह, पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है वह सूखने पर काला और ठोस हो जाता है उसे गोंदिया कहते हैं, गोंद सियाह देखने में काले रंग का होता है। यह बहुत ही पौष्टिक होता है उसमें उस पेड़ के औषधीय गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई बीमारियों को हम से दूर रख सकता है।
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 2310
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



