जीवन में कठिन समय आता है तो हर किसी के लिए जिंदगी गुजारना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई बार कमर दर्द, घुटनों का दर्द, जोड़ों का दर्द आमतौर पर हमारी परेशानियों का कारण बनता है। कई बार दर्द हल्का होता है, लेकिन कभी-कभी ये इतना बढ़ जाता है कि चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। अगर समय पर ध्यान दिया जाए तो ये एक बड़ी परेशानी भी बन जाती है। ऐसे में कमर का दर्द अगर किसी व्यक्ति को हो जाए तो जिंदगी गुजारना काफी मुश्किल होता है। कमर दर्द एक आम समस्या बन गई है। सिर्फ बड़ी उम्र के लोगों में ही नहीं, बल्कि युवाओं में भी देखने को मिलती है। कमर दर्द जिसकी वजह से आपको झुकने में, बैठनें में या फिर सोने में भी दिक्कत आने लगती है। शरीर में विटामिन की कमी के कारण कमर दर्द की समस्या होती है। कई बार लगातार बैठने से कमर में दर्द होने की संभावना और बढ़ जाती है। दरअसल बैठने के दौरान बॉडी पॉस्चर सही नहीं होने के कारण भी कमर दर्द की समस्या होती है ऐसी ही कहानी है सहारनपुर के रहने वाले चंद्रपाल जी की जिनके लिए कमर का दर्द मुसीबत बन गया पर उन्होंने हार नहीं मानी और दर्द को हरा दिया। आइये जानते हैं कि उन्होंने हकीम जी की कौन सी बूटी अपनाई जिससे उन्हें दर्द में पहले से काफी राहत मिल सकीं।
कौन है चंद्रपाल जी?
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद तहसील के भायला गाँव के निवासी चंद्रपाल जी की उम्र 58 साल है और वह चक्की चलाने का काम करते हैं, और यही इनका मुख्य व्यवसाय था जिसमें आटा चक्की और तेल निकालने की चक्की थी। इनकी जिंदगी एकदम ठीक चल रही थी लेकिन फिर एक समय ऐसा आया जब इनकी पूरी दिनचर्या दर्द से घिर गई थी। दरअसल चंद्रपाल जी के कमर में असहनीय दर्द होने लगा था, कमर का दर्द इतना बढ़ गया था कि न तो वह अपनी चक्की चला पा रहे थे, और न ही किसी काम में हाथ बटा पा रहा था। इनकी पूरी दिनचर्या, जो कभी आराम से चलती थी, अब एक बोझ बनकर रह गई थी। कमर दर्द इनके जीवन में एक बड़ी परेशानी बनकर सामने आया था।
जानिए सहारनपुर के चंद्रपाल जी की दर्दभरी कहानी?
दरअसल 58 साल के चंद्रपाल जी की जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा था और कई सालों से चक्की से तेल पिराई और आटा पिसाई करके अपनी जिम्मेदारियाँ बखूबी निभाते आ रहे थे। लेकिन फिर करीब चार साल पहले अचानक एक दिन उन्हें कमर में हल्का सा दर्द उठा, चंद्रपाल जी इस दर्द को इग्नोर करके अपना काम करते रहे, उनकी इसी लापरवाही की वजह से दर्द बढ़ता ही चला गया। धीरे-धीरे दर्द कंधे और फिर गर्दन तक पहुँच गया। जिससे चंद्रपाल जी को रोज़मर्रा के कामों में भी कठिनाई होने लगी। झुकने पर इतना असहनीय दर्द होता था कि दर्द से कराह उठते थे। धीरे- धीरे उनकी स्थिति ऐसी हो गई थी कि न तो झुक पा रहे थे और न ही कोई भारी वजन उठा पा रहे थे। इतना ही नहीं लंबे समय तक खड़े होना भी उनके लिए बहुत मुश्किल हो गया था। उठने-बैठने में दिक्कत होती थी, बैठे रहने पर भी असहनीय तकलीफ होती रहती थी। इस हालत की वजह से उनका चक्की वाला काम कम होने लगा था।
चंद्रपाल जी ने डॉक्टर को दिखाया, दवाइयाँ खाईं, जिससे उन्हें कुछ समय के लिए आराम तो मिलता था,लेकिन असर हटते ही दर्द फिर से वापस लौट आता था। कई सालों तक लगातार दवाइयाँ खाने के बाद भी जब इन्हें सही से राहत मिलती दिखाई नहीं दी तो उनकी जिंदगी में उदासी छा गई थी। पिछले कई सालों से कमर दर्द में गुजारने के बाद चंद्रपाल जी ने उम्मीद ही छोड़ दी थी कि वह कभी पहले की तरह सही हो पाएंगे। बस उनके जीवन में अब दर्द ही बचा था जिसके सहारे उनकी जिंदगी गुजर रही थी ऐसे में वो करें भी तो क्या करें ये उन्हें समझ ही नहीं आ रहा था।
इस कहानी से जुड़ीं कुछ खास परेशानीयाँ:
- कमर और कंधे के दर्द की वजह से चंद्रपाल जी को दैनिक कार्यों में परेशानी होने लगी थी।
- दवाइयाँ खाने के बावजूद दर्द बार-बार वापस आ जाता था, कहीं से कोई सही राहत नहीं मिल पा रही थी।
- उनका चक्की का काम उनके बेटे को करना पड़ रहा था। न तो वह वजन उठा पा रहे थे और न ही लंबे समय तक खड़े हो पा रहे थे।
आखिरकार हकीम साहब की बूटी से हुई राहत की शुरुआत
एक साल तक लगातार दवाइयाँ खाने के बाद भी जब चंद्रपाल जी को कोई राहत नहीं मिली तो उन्हें एहसास हुआ कि अंग्रेजी दवाइयों से उन्हें कोई फायदा नहीं हो रहा है। अब उन्हें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। इसी बीच एक दिन टीवी का चैनल बदलते समय उन्होंने हकीम सुलेमान खान साहब का प्रोग्राम सेहत और जिंदगी देखा। इस प्रोग्राम में चंद्रपाल जी ने ऐसे लोगों को सुना जो जोड़ों के दर्द की तकलीफ झेलने के बाद हकीम साहब से जुड़े थे और अब दर्द में राहत पा चुके हैं। कई लोगों को दर्द से राहत मिलते देखकर उन्होंने हकीम साहब पर विश्वास किया और हकीम साहब की बूटी को अपनाने का निर्णय लिया। उन्होंने टीवी से नंबर लेकर तुरंत हकीम साहब को संपर्क किया और अपनी पुरानी कमर के दर्द की समस्या से अवगत कराया। हकीम साहब की टीम ने उनकी समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद कमर के दर्द में सबसे कारगर गोंद सियाह के सेवन की सलाह दी। चंद्रपाल जी ने हकीम साहब की ऑफिशियल वेबसाइट ATIYA HERBS से ऑनलाइन ऑर्डर करके बूटी मँगवा ली और सेवन करना शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में उन्हें पहले से काफी राहत मिल गई अब वह सोचने लगे कि फिर से पहले की तरह सारे काम कार पाएंगे और हुआ भी कुछ ऐसा ही। हकीम जी द्वारा बताई गई बूटी को पूरा लेने के बाद अब चंद्रपाल जी एकदम अच्छी जिंदगी जी पा रहे हैं। अपनी चक्की का कारोबार अच्छे से देख पा रहे हैं और बिना दर्द के हर वो काम करने लगे हैं जिसके लिए उन्हें दर्द सहना पड़ता था। पहले से उनकी जिंदगी काफी खुशहाल हो गई है। अब उन्हें किसी तरह की कोई भी कमर दर्द को लेकर चिंता नहीं होती है।
हकीम साहब की बूटी अपनाने के बाद आए महत्वपूर्ण बदलाव:
- कमर दर्द में राहत मिली जिसके बाद यूनानी बूटी पर इन्हें विश्वास हो गया।
- अब वह फिर से चक्की का काम पहले की तरह बखूबी करने लगे हैं।
- कमर दर्द में उठना-बैठना आसान हो गया है और अब रोज़मर्रा के कामों में पहले से सहजता आयी है।
चंद्रपाल जी अपनी बीवी को याद करते हुए भावुक, आखिर क्यों?
दरअसल चंद्रपाल जी की पत्नी भी लंबे समय से जोड़ों के दर्द की समस्या से परेशान थीं, इस समस्या के चलते 2020 में उनकी पत्नी भगवान को प्यारी हो गई और वह अकेले रह गए। चंद्रपाल जी कहते हैं की जब मेरी पत्नी के बारे में सोचता हूं, तो दिल भर आता है। वे भी हमेशा दर्द से परेशान रहती थीं, मेरी पत्नी ने भी कई सालों तक दर्द और तकलीफों का सामना किया, लेकिन अफसोस, हम समय पर हकीम साहब तक नहीं पहुंच पाए। अगर हमने पहले ही यूनानी बूटी अपनाई होती, तो शायद आज मेरी पत्नी हमारे साथ होती। यही दुख मुझे हमेशा रहेगा, लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि यदि किसी को भी जोड़ों के दर्द की समस्या हो या अन्य दिक्कत हो तो हकीम साहब के घरेलू नुस्खों से राहत पाई जा सकती है।
कमर दर्द में मिली राहत से जिंदगी हुई खुशहाल
चंद्रपाल जी का कमर दर्द अब पहले से कम हो गया है राहत मिलने के बाद उनके जीवन में पहले से काफी राहत और खुशियां लौट आई है। आलम ये है कि अब वो पहले से अब सारे काम खुद कर लेते हैं चक्की से भारी वजन के कट्टे आसानी से उठा लेते हैं। यूनानी बूटी के सेवन ने चंद्रपाल जी की सेहत को पूरी तरह से बदल दिया है। परिवार की चिंता भी उन्हें देखकर बिल्कुल कम हो गई है और ये हकीम जी की मदद से ही संभव हो पाया है। वह यही चाहते हैं कि हकीम जी इसी तरह लोगों की मदद करते रहें और जैसे उन्हें कमर दर्द में आराम मिला है वैसे ही और लोगों को भी मिलें। कमर दर्द में मिली राहत के बाद अपनी बेहतर जिंदगी का श्रेय वो हकीम सुलेमान खान साहब को ही देते हैं।
गोंद सियाह क्या है?
यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



