जिंदगी में कब किसको क्या परेशानी आ जाए, इसका कोई अंदाजा नहीं लगा सकता। एक समय था जब बुढ़ापे में ही जोड़ों का दर्द जैसे – घुटनों का दर्द, कमर का दर्द परेशान करता था। लेकिन आजकल बदलते हुए खान पान, व्यस्त और तनाव भरे जीवन में बुढ़ापे से पहले ही घुटनों के दर्द और कमर दर्द जैसी समस्याएं होने लगी हैं। घुटनों का दर्द अगर एक बार जीवन में आ जाए तो बढ़ता ही चला जाता है और अगर समय रहते सही उपचार न मिले तो व्यक्ति अपनी पूरी जिंदगी इसी दर्द में गुजार देता है। पुणे शहर में शनिवार पेठ की गुलाब कुंज कॉलोनी में रहने वाली आरती मुरलीधर पवार जी के जीवन में भी ऐसा समय आया। लगभग 15 साल पहले हुई चिकनगुनिया की समस्या के बाद उनके शरीर के जोड़ों में असहनीय दर्द होने लगा। खासकर घुटनों और कमर दर्द ने उन्हें पूरी तरह तोड़कर रख दिया था। घुटनों के दर्द की वजह से उनका चलना-फिरना, उठना-बैठना, सीढ़ियाँ चढ़ना सब कुछ मुश्किल हो गया था। कई तरीके आजमाने के बाद भी जब उन्हें फायदा नहीं मिला तो उन्हें लगने लगा था कि अब आगे का सारा जीवन घुटनों के असहनीय दर्द में ही गुजारना पड़ेगा। लेकिन सालों दर्द में गुजारने के बाद उन्हें एक ऐसा रास्ता मिला जिसके असर से कुछ ही महीनों में उन्हें घुटनों के दर्द से राहत मिल गई। चलिए आपको बताते हैं उनकी पूरी कहानी कि कैसे उन्हें दर्द में राहत मिली?
आरती पवार जी की दर्द भरी कहानी
पुणे शहर में रहने वाली आरती पवार जी ने 25 साल तक पोस्ट ऑफिस के एजेंट के रूप में काम किया है। उनके पति हाल ही में बैंक से रिटायर्ड हुए हैं। वह काफी सज्जन और दयालु स्वभाव की महिला हैं उन्हें लोगों की मदद करना काफी अच्छा लगता है। आपको बता दें परिवार की जिम्मेदारी और काम में व्यस्थ होने की वजह से वह खुद की सेहत पर ध्यान नहीं दे पाई और घुटनों का दर्द उनके लिए परेशानी बन गया। एक बीमारी की वजह से उनके जीवन के सबसे मुश्किल समय आया। दरअसल आरती पवार जी को घुटनों के दर्द ने पूरी तरह से घेर लिया था। वह न तो सही से चल पाती थीं, न ही किसी काम को आराम से कर सकती थीं। हर कदम पर घुटनों में असहनीय दर्द होता था और कट-कट की आवाज आती थी। घुटनों के दर्द ने उनके रोज़मर्रा के कामों को मुश्किल बना दिया था। घुटनों के दर्द के कारण उनका उठना-बैठना, सीढ़ियाँ चढ़ना, यहां तक कि चलना-फिरना भी तकलीफदेह हो गया था। डॉक्टर ने उन्हें कैल्शियम की कमी बताई जिसके बाद दर्द में दवा लेने के बाद थोड़ा आराम मिलता इसी के साथ उनका जीवन कटने लगा। लेकिन इससे कुछ समय तक ही फायदा मिलता था नहीं तो दर्द फिर से शुरू हो जाता था। एक समय ऐसा आया जब वह बिना सहारे के चल भी नहीं सकती थीं। बाथरूम तक जाने के लिए भी सहारे कि जरूरत पड़ती थी। उनका पूरा जीवन दर्द और दवाइयोंके बीच सिमटकर रह गया था। यही वजह थी कि उन्हें खाना बनाने के लिए कुक और घर का काम करने के लिए मेड रखनी पड़ी थी।
कई सारे प्रयास करने के बावजूद दर्द कम नहीं हुआ, आखिर क्यों?
कई सालों तक दर्द सहने के बाद भी जब आरती जी को अंग्रेजी दवाइयों से कोई फायदा मिलता दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने कई तरह के तेलों से मालिश करवाई। लेकिन उन्हें दर्द में आराम नहीं मिला। कई बार तो वो चलने के लिए भी बिल्कुल लाचार हो जाया करती थी। हालांकि उन्होंने यह तरीका दो महीने तक अपनाया, लेकिन उन्हें उस समय कोई खास फायदा नहीं मिला। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद घुटनों का दर्द जस के तस बना हुआ था। उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी कि वह पहले की तरह स्वस्थ हो पाएंगी। लेकिन वो कहते हैं न जीवन में सुख आता है तो दुख भी आता है शायद ये दुख के दिन ही उनके चल रहे थे। दर्द से राहत पाने के रास्ते देखते हुए वह बिल्कुल थक चुकी थी।
घुटनों के दर्द से परेशान आरती जी जुड़ी हकीम सुलेमान खान साहब से।
कई सारे प्रयास करने के बाद भी जब आरती जी को किसी तरह कि कोई राहत नहीं मिली तो वह अपनी जिंदगी से परेशान हो गई थीं। लेकिन वो कहते हैं न कि दिन हमेशा एक जैसे नहीं रहते हैं कभी न कभी जरूर बदलते हैं। आरती जी के जीवन में भी एक उम्मीद जागी जब एक दिन उन्होंने यूट्यूब पर यूनानी के मशहूर हकीम सुलेमान खान साहब का एक वीडियो देखा, जिसमें घुटनों के दर्द के लिए एक बूटी के बारे में बताया गया था। इसको आजमाकर कई लोगों को जोड़ों के दर्द में फायदा मिला है। एक दिन आरती जी को बहुचर्चित शो सेहत और जिंदगी के बारे में पता चला। कई दिनों तक इस प्रोग्राम को देखने के बाद आरती जी ने भी हकीम साहब से जुड़ने के बारे में सोचा और दिए गए नंबर पर कॉल करके अपनी पंद्रह साल पुरानी घुटनों के दर्द की समस्या के बारे में बताया। उनकी घुटनों के दर्द की समस्या को अच्छे से सुनने और समझने के बाद उन्हें जोड़ों के दर्द में सबसे कारगर बूटी गोंद सियाह के सेवन की सलाह दी गई, साथ में हल्दी प्लस कैप्सूल का सेवन करने के लिए भी बोला गया। आरती जी ने हकीम साहब की ऑफिसियल वेबसाइट ATIYA HERBS से बूटी मंगाकर हकीम जी के बताए अनुसार सेवन करना शुरू कर दिया। इससे उन्हें कुछ समय में ही राहत मिलनी शुरु हुई। पहले जहां वो चल नहीं पाती थी पर अब बिना सहारे के आसानी से चल लेती हैं।
हकीम जी की बूटी का सेवन कर दिखने लगा पहले से बदलाव
आरती जी ने बूटी का नियमित रूप से सुबह-शाम सेवन करना शुरू कर दिया। पहले ही महीने उन्हें दर्द में फर्क दिखाई देने लगा। उन्हें चलने-फिरने, उठने-बैठने में आसानी होने लगी। असर देखकर आरती जी को हकीम साहब के घरेलू नुस्खों पर विश्वास हो गया और उन्होंने सेवन जारी रखा। दो महीने तक नियमित सेवन से उन्हें इतना फायदा मिल गया है कि पहले जो काम करना उन्हें असंभव लगते थे, वो सारे काम वह आसानी से करने लगी हैं। एक समय था जब उन्हें चलने-फिरने और उठने-बैठने में भी तकलीफ होती थी जबकि अब वह सीढ़ियाँ तक आसानी से चढ़ जाती हैं, रोजाना सुबह-शाम एक घंटे तक टहलती हैं। इतना ही नहीं अब तो वह घर के काम भी कर लेती हैं। उनका शरीर फिर से स्वस्थ होने लगा, और पहले जो समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थी, अब वह कम होने लगी। उनकी जिंदगी में पहले से बदलाव आ गया है। जब उन्हें घुटनों के दर्द से राहत मिल गई तो उन्होंने पेट कि सफाई के लिए भी हकीम साहब के यहाँ से नमक जैतून मंगाया और उसका सेवन करती हैं जिससे अब उनका पाचन दुरुस्त राहत है।
परिवार वाले हो गए गए हैं बेफिक्र
आरती जी को घुटनों के दर्द में फायदा मिलने से उनके पति बहुत खुश हैं। वह आरती जी को लेकर हर समय चिंतित रहते थे, अब पूरी तरह से बेफिक्र हो गए हैं। उनके बेटे और बहु बैंगलोर में रहते हैं, मम्मी कि तकलीफ की वजह से वह लोग भी बहुत दुखी रहते थे लेकिन अब आरती जी को राहत मिलने से वह भी बिना किसी चिंता के अपने जीवन को आनंद से जी रहे हैं। आरती पवार की यात्रा हमें यह सिखाती है कि घुटनों का दर्द चाहे जितना भी भयंकर क्यों न हो, कभी भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। आज जो बेहतर जिंदगी आरती पवार जी गुजार रही हैं उसका सारा श्रेय वह हकीम सुलमान खान साहब को देती हैं। वह यही चाहती हैं कि हकीम जी स्वस्थ और सेहतमंद रहें और लोगों की मदद करते रहें।
गोंद सियाह क्या है?
यह पौधा तिन्दुक कुल एबीनेसी का सदस्य है जो समस्त भारतवर्ष में पाया जाता है। इस पेड़ के तने को चीरा लगाने पर जो तरल पदार्थ निकलता है उसे गोंद सियाह कहते हैं, यह बहुत ही पौष्टिक होता है और सूखने पर काला और ठोस हो जाता है, इस गोंद में उस पेड़ के गुण पाये जाते हैं। गोंद सियाह हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जो हमारे जोड़ों के दर्द के साथ शरीर की कई समस्याओं को हम से दूर रखता है। इसकी खुराक को हकीम साहब या उनकी संस्था के यूनानी विशेषज्ञों द्वारा बताई गयी मात्रा में ही लेना चाहिए। ज्यादा या कम मात्रा में इसका सेवन इसकी काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
हल्दी प्लस कैप्सूल क्या है?
हल्दी प्लस कैप्सूल शरीर में प्रतिरक्षा और रक्त को शुद्ध करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक शक्तिशाली मिश्रण है। हल्दी के गुणों से भरपूर, यह हर्बल सप्लीमेंट पारंपरिक लाभों से कहीं आगे है। यह रक्त को साफ़ करता है, कोलेस्ट्रॉल के इष्टतम स्तर को बढ़ाता है, वात और पित्त असंतुलन के संतुलन को बहाल करता है। एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर, इस फॉर्मूलेशन में उच्च प्रभावकारिता के लिए सलाई और काली मिर्च भी शामिल हैं। ऐसी दुनिया में जहां शुद्ध हल्दी का दैनिक समावेश कम हो रहा है, हकीम सुलेमान खान इन हर्बल कैप्सूल को हल्दी के व्यापक लाभों को प्राप्त करने के एक सुविधाजनक तरीके के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
यहाँ देखिये उन्होंने हकीम साहब को धन्यवाद करते हुए क्या कहा
आप भी गोंद सियाह मंगवाने के लिए इस नंबर पर कॉल कर सकते हैं।
011 6120 5521
- Clinic – The Herbals – Atiya Healthcare
- Address – 21B/6, Basement Near Liberty Cinema, New Rohtak Road, Karol Bagh, New Delhi-5



